पिथौरागढ़। जिला अस्पताल में पिछले एक साल में फेफड़े और मूत्राशय कैंसर के 20 मरीज मिले हैं। इसमें से एक मरीज की मौत हो चुकी है।
बीडी पांडे जिला अस्पताल में 2023 में फेफड़े के कैंसर के 12 और मूत्राशय कैंसर के आठ मरीज इलाज के लिए आए। इसमें 46 से 70 साल से अधिक आयु के बुजुर्ग भी शामिल हैं। जनवरी में फेफड़े के कैंसर के दो, फरवरी में एक, मई में दो, जून में दो, अगस्त में तीन, अक्तूबर और नवंबर में एक-एक मरीज मिले। मूत्राशय कैंसर के फरवरी में एक, मार्च में दो, जुलाई में दो, अगस्त में दो, अक्तूबर में एक मरीज मिला। इनका नियमित रूप से इलाज होता है।
अगस्त में फेफड़े के कैंसर से 68 वर्षीय बुजुर्ग की मौत हो चुकी है। कुछ मरीज बाहर से यहां आएं और उनका इलाज चल रहा है। अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार फेफड़े के कैंसर के अलग-अलग कारण होते हैं। भारत में फेफड़े के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। शोध बताते हैं कि अमेरिका में पुरुषों और महिलाएं में फेफड़े का कैंसर दूसरा सबसे अधिक पाया जाने वाला कैंसर है। पीएमएस डॉ. जेएस नबियाल ने बताया कि कैंसर पीड़ितों का इलाज किया जाता है।
कोट
मूत्राशय कैंसर ध्रूमपान करने करने वालों में अक्सर देखा जाता है। बैटरी वर्कर को मूत्राशय कैंसर होता है। पेशाब में खून आना, थक्के आना, किडनी में बुखार, दर्द, खून आना इसका लक्षण हैं। इन मरीजों को नियमित रूप से अपनी जांच कराने की जरूरत है। - डॉ. एलएस बोरा, वरिष्ठ सर्जन जिला अस्पताल।
कोट
फेफड़े के कैंसर का मुख्य कारण धूम्रपान है। यह फैक्टरी में काम करने वाले लोगों में अधिक देखा जाता है। सीटी स्कैन में अगर फेफड़ों में गांठ निकलती है तो उन्हें बायोप्सी के लिए बाहर भेजा जाता है। इसके अलावा प्रोस्टेट, एबडोमिन का कैंसर का फेफड़े में जाना कैंसर का दूसरा कारण है। - डॉ. डीएस धर्मशक्तू, मुख्य फिजिशियन, जिला अस्पताल।