थल (पिथौरागढ़)। थल का महिला चिकित्सालय स्टाफ नर्स के सहारे चल रहा है। 19 साल से बड़ी आबादी का उपचार तो नहीं बस सामान्य प्रसव स्टाफ नर्स कर रही हैं। महिला उत्थान योजना के तहत गोचर में महिला चिकित्सालय का लोकार्पण तत्कालीन भाजपा सरकार में चिकित्सा और स्वास्थ्य मंत्री तिलक राज बेहड़ ने 10 सितंबर 2003 में किया था। वर्ष 2004 में महिला चिकित्सक का तबादल के बाद अस्पताल चिकित्सक विहीन है। 2008 में फार्मासिस्ट का भी तबादला हो गया। वर्तमान में तीन स्टाफ नर्स और एक एएनएम के भरोसे चल रहा है। संवाद
प्रसव के लिए इन गांवों से आती हैं गर्भवती
तल्ला जोहार के सैणरांथी, कोटा पंद्रहपाला, बिर्थी, बांसबगड़ ही नहीं बल्कि थल क्षेत्र के दौली कौली, जोग्युड़ा थल, सत्याल गांव, अठखेत, बलतिर, अल्मिया गांव, गोल, लेजम, बल्याऊं, दड़मोली, कोटगाड़ी, हीपा, कुमालगांव, सैनर, नायलसपोली, हत्वाल गांव, तुर्गोली।
इलाज नहीं सिर्फ प्रसव होता है
थल (पिथौरागढ़)। महिलाओं की कोई ओपीडी नहीं होती है। इलाज के नाम पर यहां पर उनका केवल सामान्य प्रसव कराया जाता है। बीस साल बीत जाने के बाद भी इस अस्पताल में अल्ट्रासाउंड और एक्सरे की कोई सुविधा नहीं है। सुदूर गांव से आने वाली गर्भवती और हड्डी टूटने पर महिलाओं को यहां से 52 किमी जिला पिथौरागढ़ और 225 किमी हल्द्वानी की दौड़ लगानी पड़ती है। संवाद
कोट
थल अस्पताल में सुदूरवर्ती क्षेत्रों से गर्भवती महिलाएं प्रसव के लिए आती है। सरकार और विभाग को इस अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा देनी चाहिए। - दीपा वर्मा, प्रधान जोग्युड़ा थल।
कोट
महिला अस्पताल में 20 साल से महिला चिकित्सक की नियुक्ति न होना दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार और विभाग महिला चिकित्सक की नियुक्ति की नियुक्ति करनी चाहिए।- रेखा खड़ायत, प्रधान दौली कौली।
कोट
रिक्त पदों की जानकारी शासन को भेजी गई है। चिकित्सकों की नियुक्ति होने पर महिला चिकित्सक की तैनाती अस्पताल में की जाएगी। - डॉ. एचसी ह्यांकी, सीएमओ, पिथौरागढ़।