कनालीछीना (पिथौरागढ़)। स्वास्थ्य विभाग के भवन निर्माण के दौरान खतरे में आए मकान का ग्रामीण को अभी तक मुआवजा नहीं मिला है। मकान के खतरे में आने से ग्रामीण को दो वर्ष तक पड़ोसी के घर में शरण लेनी पड़ी थी। मुआवजा नहीं मिलने से खिन्न ग्रामीण ने अब परिवार के सदस्यों के साथ भूख हड़ताल पर बैठने की चेतावनी दी है।
भवान सिंह दिगारी का कहना है कि 2009 में कार्यदायी संस्था लोनिवि ने चिकित्सा विभाग का भवन बनाया था। चिकित्सा विभाग के भवन के लिए खोदी गई जमीन के कारण ठीक ऊपर स्थित उनका 18 कमरों के मकान में दरारें पड़ गई। मकान के खतरे में आने से उन्हें मकान खाली कर दूसरे के घर में शरण लेनी पड़ी। उनके किराएदार भी मकान छोड़कर चले गए। इससे उनकी किराए से होने वाली आजीविका का साधन भी बंद हो गया।
भवान सिंह का आरोप है कि अब तक मुआवजे के लिए वह तहसील प्रशासन से लेकर मुख्यमंत्री तक से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन आज तक उन्हें मुआवजा नहीं मिल पाया है। कोई मदद नहीं मिलने के कारण उन्हें मजबूर होकर खतरे की जद में आए मकान में रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। बारिश होने पर भवन के गिरने का खतरा बना रहता है। भवान सिंह का कहना है कि उनके बेटे भी बेरोजगार हैं। यदि उनकी नहीं सुनी गई तो परिवार के साथ भूख हड़ताल पर बैठने के लिए मजबूर होंगे।