पिथौरागढ़। बांध के लिए विस्थापन, पुनर्वास को लेकर पंचेश्वर घाटी के लोगों में संशय का माहौल है। लोगों को अपनी जमीन, मकान, बगीचे समाप्त होने का डर है। उन्हें असुविधा मंजूर है लेकिन वह अपना पैतृक गांव नहीं छोड़ना चाहते। पंचेश्वर घाटी संघर्ष समिति के पदाधिकारियों ने डूब क्षेत्र के सल्ला, सेल, चौसिल, तपानी, पंथ्यूड़ा, सिमलौदा, खेतपुड़ौली गांवों में बैठक कर रायशुमारी की। बताया कि इन गांवों का कोई भी व्यक्ति बांध के पक्ष में नहीं है। यदि बांध बनाना जरूरी है तो हर परिवार को 30 लाख रुपये की राशि अग्रिम दी जाए।
इस घाटी में कई प्रकार के काफी फल होते हैं। अपने संसाधनों में ही लोग खुश हैं। कई पीढ़ियों से लोग इन गांवों में रह रहे हैं। क्षेत्र के सभी लोगों ने कहा कि वह बांध के विरोध में आंदोलन को तैयार हैं। अधिकतर ग्रामीण अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं। पंचेश्वर घाटी संघर्ष समिति के संयोजक मनोज सिंह सामंत, अध्यक्ष मान सिंह सामंत ने कहा कि गांव के लोगों के साथ अन्याय न हो, इसकी पूरी कोशिश की जाएगी। पंथ्यूड़ा निवासी बद्री दत्त पंत ने कहा कि हर परिवार के पास आम, केला, पपीता, अमरूद, आंवले के बगीचे हैं। पर्याप्त सिंचित भूमि है। इसे कोई भी छोड़ना नहीं चाहता। खेतपुडौली गांव के भीम सिंह ने कहा कि पंचेश्वर घाटी के लोग मछली पालन से भी आजीविका चलाते हैं। उन्होंने कहा कि महाकाली में मिलने वाली महाशीर मछली का अस्तित्व बांध बनने पर समाप्त हो जाएगा। समिति के सदस्य रवि महर, हरीश रैक्वाल, प्रकाश सिंह, सुरेश सिंह आदि ने कहा कि बांध का विरोध किया जाएगा।