थल (पिथौरागढ़)। इस बार सूखे के कारण हालात बेहद खराब होते जा रहे हैं। फसलों को हो रहे नुकसान से किसान संकट में हैं। इस समय तक खेतों में गेहूं और मसूर की फसल लहलहाने लगती थी, लेकिन अब तक पौधे पांच सेंटीमीटर तक भी ऊपर नहीं आ पाए हैं। फसल का जितना हिस्सा उगा है उस पर सूखे और पाले की मार पड़ रही है।
किसानों का कहना है कि इस बार जानवरों के लिए चारा एकत्र करने की भी समस्या खड़ी होने लगी है। रामगंगा घाटी के हर गांव में सूखे का असर है। सितंबर से इस क्षेत्र में बारिश नहीं हुई है। किसान अब तक बारिश की आस में थे, लेकिन अब उनको लगता है कि यदि बारिश हो भी जाती है तो फसलों को कोई फायदा नहीं पहुंचेगा। सब्जी, चारे की घास सभी कुछ सूखे और पाले की भेंट चढ़ गए हैं। किसान इस बात से भी चिंतित हैं कि आने वाले समय में पेयजल का संकट भी गहराएगा।
पाले से हो रहा ज्यादा नुकसान
आमथल निवासी किसान गंगा देवी का कहना है कि मौसम की ऐसी स्थिति पहली बार देखी। पहले दिसंबर में बारिश जरूर हो जाती थी। इससे गेहूं और मसूर की फसल अच्छी हो जाती थी। इस बार लंबे समय से बारिश नहीं हुई। इस कारण खेत सूख गए हैं। ठंड के कारण पाला ज्यादा गिर रहा है। उससे भी फसलों को भारी नुकसान पहुंच रहा है।
सरकार निपटने के लिए नीति बनाए
पतेत निवासी जानकी देवी का कहना है कि फसलों को जानवर भी भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। जंगली जानवरों का आतंक समाप्त करने के लिए अब तक कोई उपाय नहीं किया गया। वह कहती हैं कि पहाड़ का किसान चारों ओर से मारा जा रहा है। कभी मौसम तो कभी जंगली जानवर किसानों की मेहनत पर पानी फेर रहे हैं। सरकार को इनसे निपटने की नीति बनानी चाहिए।
सर्वे का काम सही ढंग से किया जाए
ग्वीरा निवासी किसान चतुर सिंह का आरोप है कि सरकार सूखा राहत के नाम पर भी किसानों के साथ छल करेगी। पहले भी कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं। सर्वे का काम गलत होने के कारण कई लोग मुआवजे से वंचित हो जाते हैं। यदि सूखे का सर्वे हो तो उसमें पारदर्शिता लाई जाए, ताकि हर किसान को क्षति का पूरा मुआवजा मिल सके।
पहाड़ के लिए अलग से ठोस नीति बने
अल्मियागांव निवासी मान सिंह का कहना है कि सरकार को अब तक सूखे का सर्वे करा देना चाहिए था। सितंबर से बारिश न होने के कारण फसलें चौपट हो गई हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जल्दी से टीम भेजे और हर किसान को राहत दे। वह कहते हैं कि पहाड़ की फसल को प्रतिकूल मौसम से बचाने के लिए अलग से ठोस नीति बननी जरूरी है।