धारचूला (पिथौरागढ़)। कैलाश मानसरोवर यात्रा 2018 के समय यात्रियों का सामान ढोने के लिए लगाए जाने वाले मजदूरों (पोर्टर्स) और घोड़े वालों (पोनी) को यात्रा शुरू होने से पहले आपदा प्रबंधन की जानकारी दी जाएगी। शुक्रवार से यह प्रशिक्षण कार्यक्रम यहां शुरू हो गया है। कुल 400 पोनी और पोर्टर्स को प्रशिक्षण दिया जाएगा। तीन दिन तक चलने वाले प्रशिक्षण के दौरान पोनी, पोर्टर्स को नदी तैरना, प्राथमिक चिकित्सा, आपदा के समय राहत पहुंचाना आदि की जानकारी दी जाएगी।
एसडीआरएफ से महानिदेशक संजय गुंज्याल ने दीप जलाकर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा कि राज्य के कई हिस्से आपदा की दृष्टि से बेहद संवेदनशील हैं। कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग अति संवेदनशील की श्रेणी में आता है। यह यात्रा हर साल ठीक मानसून सीजन में शुरू होती है। यदि पोनी और पोर्टर्स को आपदा प्रबंधन की जानकारी होगी तो वह कैलाश यात्रियों की मदद कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर पिछले तीन वर्ष से एसडीआरएफ के जवान सेवाएं दे रहे हैं।
कई मौकों पर एसडीआरएफ ने यात्रियों की मदद भी की है। उन्होंने उम्मीद जताई कि इस प्रशिक्षण के बाद अगले साल की यात्रा ज्यादा सुरक्षित हो जाएगी। कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंधक आरसी जोशी ने बताया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय युवक पोनी, पोर्टर्स के रूप में प्रतिभाग करते हैं। यह युवक स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों और हालात से पूरी तरह से वाकिफ होते हैं एवं आपात स्थिति में यात्रियों के साथ सर्वप्रथम पोर्टर्स ही होते हैं, जो उचित सुरक्षा कार्य भी कर सकते हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंध निदेशक धीराज गर्ब्याल के दिशा निर्देश पर यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान पोनी, पोर्टर्स को उचित व्यवहार, आचरण एवं कर्तव्य के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी जाएगी। एसडीआरएफ के प्रशिक्षक संजय उप्रेती ने बताया कि प्रशिक्षण देने के लिए 23 जवान और तीन उपनिरीक्षक लगाए गए हैं। कार्यक्रम में हरीश गुंज्याल, वरिष्ठ प्रबंधक गोपाल बिष्ट, नरेंद्र अधिकारी सहित कई लोग उपस्थित थे।