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1200 परिवारों पर मंडरा रहे खतरे के बादल

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पिथौरागढ़। जिले के 1200 परिवारों पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। आपदा प्रभावितों का पुनर्वास और पुनर्स्थापना की कसरत सर्वे से आगे नहीं बढ़ सकी है। इन हालातों में इस मानसूनी सीजन में भी इन परिवारों को जोखिम भरे हालातों से जूझना पड़ सकता है।
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सीमांत जिला आपदा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है। संवेदनशील क्षेत्रों में धारचूला, मुनस्यारी, डीडीहाट, बेड़ीनाग के 64 गांव शामिल हैं। इनमें 1200 परिवार रहते हैं। यहां गुजरे सालों से आपदा लगातार अपना कहर बरपाती आ रही है। पिछली आपदाओं को देखते हुए प्रशासन इन गांवों को संवेदनशील घोषित कर चुका है। इसके साथ ही पुनर्वास और पुनर्स्थापना की कसरत चल रही है।

पुनर्वास के तहत प्रभावितों को अन्यत्र बसाया जाना है, जबकि पुनर्स्थापना के तहत प्रभावित गांवों में आपदा बचाव के तहत सुरक्षात्मक कदम उठाए जाने हैं, लेकिन संवेदनशील गांवों में से एक का भी पुनर्वास और पुनर्स्थापन नहीं हो पाया है। मानसून की दस्तक में एक माह का समय ही रह गया है। आशंकित आपदा को देखते हुए प्रभावित 1200 परिवारों की चिंता बढ़ गई है।
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पुनर्वास के लिए नहीं मिल रही भूमि
जिले में पुनर्वास के लिए भूमि की समस्या आड़े आ रही है। प्रशासन कई जगह खोजबीन के बाद भी पुनर्वास के लिए मुफीद भूमि तलाश नहीं सका है। वहीं, प्रभावित ग्रामीण पुनर्वास की शर्तों को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। वे प्रशासन से पुनर्वास पैैकेज की मांग करते आ रहे हैं। इस मामले में डीएम का कहना है कि भूमि की तलाश जारी है। शासन को वस्तुस्थिति से अवगत करा दिया है।

जिले में संवेदनशील घोषित 64 गांवों के पुनर्वास और पुनर्स्थापना की कार्यवाही के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा है। जिलास्तर पर विभिन्न बचाव योजनाओं के जरिये प्रभावित गांवों में आपदा न्यूनीकरण की कोशिश की जा रही है। -आरएस राणा, जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी, पिथौरागढ़
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