जिले के 17 ग्रामीण क्षेत्रों (तोकों) के चार हजार से अधिक लोगों के लिए इस बार की दीपावली खास है। आजाद भारत के 69 साल पूरे होने के बाद पहली बार यहां के लोगों को इस दीप पर्व पर दोहरी खुशी मिल रही है। दीप पर्व की जगमगाहट के साथ इन ग्रामीण क्षेत्रों में पहली बार बिजली के उजियारे के दर्शन लोगों को हुए है।
चंपावत जिले के चारों विकासखंडों के 17 तोक और गांवों के लोगों की रात आजादी के बाद से अब तक अंधेरे में कटती थी। वैला के ग्राम प्रधान केशव दत्त मौनी ने बताया कि रात के अंधेरे को चीरने के लिए यहां अब तक लैंप टिमटता था।
जिससे यहां महिलाओं को बेहद कठिनाई के बीच घरेलू काम निपटाना पड़ता था। वहीं स्कूल जाने वाले बच्चों को पढ़ाई करने के लिए पापड़ बेलने पड़ते थे। कम रोशनी में पढ़ाई करने से आंखों पर जोर भी पड़ता था। वहीं यहां का समाज टेलीविजन से भी दूर थे। जिससे उन्हें देश- दुनियां की खबरों से अनजान रहता था। चार्जिंग की दिक्कत के चलते यहां रहने वाले लोग अक्सर मोबाइल से भी कटे थे। पर अब उन्हें इन तमाम दुश्वारियों से निजात मिल सकेगी।
यूपीसीएल के अधिशासी अभियंता राजेश कुमार का कहना है कि इस साल 17 गांवों और तोकों को विद्युतीकृत किया गया है। इन गांवों के लोगों से संयोजन के लिए आग्रह किया गया है। 40 कनेक्शन दिए भी जा चुके हैं। आवेदन प्राप्त होते ही अन्य ग्रामीणों को भी कनेक्शन दिए जाएंगे।
इन गांवों में हुआ उजाला
पाटी विकासखंड: मंगललेख, वैला, मछियाड़ भंडारी, चौड़ा मडयुल।
चंपावत विकासखंड : सोराई, बकोड़ा, लुआर्की, मोस्टा, हर्तोला, डांडा-ककनई
बाराकोट विकासखंड : खुनाड़ी, काकरी।
लोहाघाट विकासखंड : पुंडिल, भाड़ी, डंडोरा, तल्लाखाल और बुंगा फर्त्याल।
अब भी उजाले के इंतजार में है 419 तोक
जिले के ढाई हजार तोकों में से ढेरों अब भी उजाले से वंचित हैं। बिजली विभाग के मुताबिक जिले के 419 तोक अब भी गैर विद्युतीकृत हैं। इन तोकों को दीनदयाल ग्राम ज्योति योजना से विद्युतीकृत किया जाना प्रस्तावित किया गया है।