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मरीजों की बढ़ती तादात से महिला अस्पताल बेहाल

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पिथौरागढ़। महिला अस्पताल में मरीजों की बढ़ती संख्या लोगों पर भारी पड़ रही है। अस्पताल में मरीजों को भर्ती करने के लिए जगह नहीं है। चिकित्सकों और नर्स स्टाफ की भी कमी है। स्थायी रेडियोलॉजिस्ट न होने से गर्भवती महिलाओं को खासी परेशानी का सामना करना पड़ता है। गरीब परिवार की महिलाओं को अल्ट्रासाउंड के लिए निजी अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
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यहां बने 38 बेड के महिला अस्पताल की स्वीकृत क्षमता 62 बेड है, लेकिन इसमें 44 मरीजों के लिए ही जगह है लेकिन यहां मरीजों की तादाद 600 तक पहुंच जाती है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत नहीं है। फिलहाल चंपावत जिले से रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक सप्ताह बुधवार को रेडियोलॉजिस्ट लोहाघाट से यहां पहुंच मरीजों का अल्ट्रासाउंड करते हैं। उनके अवकाश पर होने से मरीज परेशान होते हैं। पहले जिला अस्पताल से रेडियोलॉजिस्ट की व्यवस्था की गई थी। वह हफ्ते में दो दिन मंगल, बृहस्पतिवार को सेवा दे रहे थे। वह भी अवकाश पर हैं। सीएमएस डॉ. निर्मला पुनेठा ने बताया कि अस्पताल में हर माह 280-300 महिलाओं की डिलीवरी होती है। साथ ही करीब 60 सिजेरियन केस होते हैं। पिछले वर्ष अस्पताल में 3008 डिलीवरी की गई।

शासन को लिखा गया है पत्र
पिथौरागढ़। महिला अस्पताल में फिलहाल हफ्ते में एक ही दिन रेडियोलॉजिस्ट के आने से गर्भवती महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। अस्पताल की मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ. निर्मला पुनेठा ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट का पद स्वीकृत करने के लिए शासन को पत्र लिखा गया है। अस्पताल में मरीजों की बढ़ती तादाद को देखते हुए दो महिला चिकित्सक, चार स्टाफ नर्स की जरूरत है। यदि शासन स्तर से इनकी तैनाती हो जाती है तो महिला अस्पताल में मरीजों को काफी हद तक राहत मिल सकेगी।
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