पिथौरागढ़। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में केंद्र सरकार से नियमित धनराशि न मिलने के कारण इस जिले में श्रमिकों का करीब 25 लाख रुपये का भुगतान नहीं हो पाया है। वर्ष 2016 में श्रमिकों द्वारा किए गए काम के 17.20 लाख रुपये अब तक उनके खातों में नहीं पड़े हैं।
इसी तरह वर्ष 2017 में अब तक 7.95 लाख रुपये का भुगतान नहीं हो पाया है। मनरेगा के सामग्री के भुगतान की स्थिति और ज्यादा खराब है। इस मद में वर्ष 2017 का अब तक का भुगतान 1.89 करोड़ रुपये नहीं मिल पाया है, जबकि वर्ष 2016 का सामग्री मद का 1.99 लाख रुपये का भुगतान अब तक अटका हुआ है।
बताया गया कि पूरे राज्य के सभी जिलों में श्रमिकों की मजदूरी और सामग्री के भुगतान की स्थिति एक सी है। हालांकि अधिकारियों का इस बारे में तर्क दूसरा है। उनका कहना है कि मनरेगा की मजदूरी का भुगतान श्रमिक के खाते में सीधे केंद्र से होता है। कभी-कभार खाते में गड़बड़ी होने से यह राशि श्रमिक को नहीं मिल पाती। इसके अलावा बैंकों और डाकघरों से भी भुगतान में देरी हो जाती है। जिला विकास अधिकारी गोपाल गिरी ने बताया कि अभी मनरेगा में श्रमिकों की मजदूरी और सामग्री के भुगतान के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि सामग्री के भुगतान की राशि कुछ ज्यादा हो गई है। यदि केंद्र सरकार से धनराशि मिल जाती है तो सामग्री और श्रमिकों का भुगतान कर दिया जाएगा। मनरेगा के तहत जॉबकार्डधारक श्रमिकों को एक वर्ष में 100 दिन का रोजगार देने की व्यवस्था है। मनरेगा के माध्यम से भूकटाव रोकने, पानी के संरक्षण की योजनाओं को वरीयता दी जाती है। मनरेगा के माध्यम से लोगों को घर के पास ही काम मिल जाता है।