पिथौरागढ़। सीमांत वसंतोत्सव में पहुंची सभी धामों की देव डोलियों को शनिवार दोपहर बाद उनके मूल धाम के लिए वापस भेज दिया गया है। डोलों के साथ आए देव डांगरों, जगरियों, वादकों को डोला उपसमिति के सदस्य जगत मर्तोलिया ने शाल ओढ़ाकर और प्रतीक चिन्ह देकर विदा किया। सैकड़ों लोगों ने यहां रामलीला मैदान में इन देव डोलों के दर्शन किए। वसंतोत्सव में शामिल होने के लिए विभिन्न मंदिरों की देव डोलियां 18 फरवरी की शाम यहां पहुंच गई थीं।
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रदेश संगठन मंत्री सुभाष के संचालन में हुए कार्यक्रम में डोलों की विदाई के समय माहौल भावुक हो गया। बता दें कि गंगोलीहाट के महाकाली का डोला 18 फरवरी की शाम को ही कुछ देर रुकने के बाद लौट गया था। इसी तरह सुरिंग की नंदादेवी का निशान भी अपने मंदिर से सिर्फ तीन दिन के लिए बाहर रहता है।
यह निशान भी तीसरे दिन वापस हो गया। शनिवार को ध्वज की मां जयंती, जाराजिबली की छिपलाकेदार, बेड़ीनाग के नाग देवता, पांखू के कोटगाड़ी देवी का डोला और निशान अपने अपने धामों को लौट गए। डोलों और देव निशान को यहां से विदा करते समय ललित जोशी, राकेश टाकुली, महेंद्र सिंह वर्ती आदि मौजूद रहे।