पिथौरागढ़। माइग्रेशन पर अपने मूल गांव पहुंचे व्यास घाटी के पशुपालकों के मवेशी खुरपका और मुहंपका रोगों से जूझ रहे हैं। मवेशियों की यह बीमारी तेजी से फैल रही है। पऱ्शुपालकों ने विभाग से जल्द इलाज के लिए टीम भेजने की मांग की है।
धारचूला की व्यास घाटीछ के माइग्रेशन गांवों में मवेशियों के बीच खुरपका और मुंहपका बीमारी तेजी से फैल रही है। अब तक सैकड़ों मवेशी इसकी चपेट में आ चुके हैं। घाटी के गांव गुंजी, बूंदी, कुटी में बीमारी का ज्यादा प्रकोप है। मवेशियों में बीमारी के इतर विभाग की तैयारी और इंतजाम नाकाफी हैं।
गुंजी में दो साल पहले पशु सेवा केंद्र खोला गया था। लेकिन पशुधन प्रसार अधिकारी की तैनाती न होने से केंद्र शोपीस बना है। ग्रामीणों को मवेशियों के इलाज की सुविधा नहीं मिल पा रही है। पीड़ित पशुपालकों ने विभाग से गांवों में चिकित्सकों की टीम भेजने की मांग की है। मुख्य पशुचिकित्सा अधिशासी डॉ विद्यासागर कापड़ी का कहना है कि प्रभावित गांवों में चिकित्सीय टीम भेज दी गई है।