पिथौरागढ़। पांच लाख की आबादी वाले पिथौरागढ़ जिले में डायलिसिस की सुविधा नहीं है। यहां के मरीजों को हल्द्वानी से लखनऊ तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। इससे परेशान किडनी के कई रोगी परिवार के साथ यहां से मैदानी क्षेत्रों को पलायन कर चुके हैं।
स्वास्थ्य विभाग खुद स्वीकार कर रहा है कि हाल के वर्षों में किडनी की बीमारी से संबंधित मरीजों की तादात में बढ़ोतरी हुई है। किडनी खराब होने पर डायलिसिस कराना पड़ता है, जबकि पिथौरागढ़ जिले में डायलिसिस की कोई सुविधा नहीं है। मरीजों को डायलिसिस के लिए यहां से हल्द्वानी, बरेली, देहरादून या लखनऊ की दौड़ लगानी पड़ती है।
इस परेशानी के चलते अधिकांश मरीज अब शहरी क्षेत्रों में ही रहने लगे हैं। पूर्व में प्रदेश सरकार ने जिला अस्पताल में 31 मार्च तक डायलिसिस यूनिट स्थापित करने की बात कही थी। डायलिसिस यूनिट के लिए अस्पताल का एक कक्ष भी खाली कराया गया, लेकिन अभी तक उपकरण यहां नहीं पहुंच पाए हैं।
पीएचसी और सीएचसी रेफरल सेंटर बने
पिथौरागढ़। जिले में जिला अस्पताल और जिला महिला अस्पताल के अलावा इग्यारदेवी, बड़ालू, कनालीछीना में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जबकि गंगोलीहाट, मुनस्यारी, डीडीहाट, बेड़ीनाग और धारचूला में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। इन चिकित्सालयों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद रिक्त हैं। ऐसे में जांच के लिए इन अस्पतालों में जाने वाले अधिकांश मरीजों को रेफर किया जाता है। इन अस्पतालों में स्त्री रोग विशेषज्ञ नहीं होने से गर्भवती महिलाओं को भी जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है। मुनस्यारी, धारचूला, गंगोलीहाट, बेड़ीनाग से जिला मुख्यालय की दूरी एक सौ किलोमीटर से अधिक है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधा नहीं होने से आपातकाल में रेफर की गई गर्भवती महिलाओं के रास्ते में प्रसव हो जाते हैं।