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गांव खाली हो जाएं और बांध बन जाए

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झूलाघाट (पिथौरागढ़)। महाकाली के किनारे स्थित गांव के लोगों को सरकार की मंशा पर संशय है। उनका कहना है कि सरकारी चाहती है कि असुविधा के कारण गांव खाली हो जाएं और बांध निर्माण की मंशा को पूरा कर लिया जाए। बांध का असर कस्बों से ज्यादा गांवों पर पड़ने वाला है। डीपीआर में गांव की खेती और मकानों के मूल्यांकन की राशि बहुत कम रखी गई है।
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आजादी के बाद और राज्य बनने के बाद असुविधाओं का सामना कर रहे गांव के लोगों का कहना है कि सरकार की प्राथमिकता बांध की रही है। विकास उसके एजेंडे में था ही नहीं। फल और सब्जी उत्पादन में अग्रणी स्थान रखने वाले कानड़ी गांव के लोगों की पंचेश्वर बांध को लेकर कुछ अलग राय है। उनका कहना है कि सरकार एक बड़े षड्यंत्र के साथ लोगों को उनकी जमीन से बेदखल करने का काम कर रही है। महाकाली के किनारे बसे गांवों का विकास ही नहीं हुआ है।

बांध बनाने की मंशा पूरी नहीं होने देंगे
कानड़ी गांव निवासी गोविंद चंद ने कहा कि सरकार को बांध नहीं बनाने देंगे। चाहे गांव के लोगों को इसके लिए लंबा संघर्ष क्यों न करना पड़े। एक तरफ तो सरकार पलायन रोकने की बात कर रही है, दूसरी तरफ विनाशकारी बांध का निर्माण कर सैकड़ों गांवों को खाली कराने की सोच रही है। सरकार की मंशा को किसी भी हालत में पूरा नहीं होने देंगे।
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संस्कृति, सभ्यता पर चोट पहुंचाने का काम
कानड़ी गांव निवासी भगवान चंद का कहना है कि भारत और नेपाल के बीच रोटी-बेटी के रिश्ते हैं। बांध बनने से सीमा के लोगों का नेपाल जा पाना मुश्किल होगा। इससे दोनों देशों के बीच सदियों पुराने रिश्तों पर असर पड़ेगा। सरकार दोनों देशों की संस्कृति, सभ्यता पर चोट पहुंचाने की कोशिश कर रही है। सरकार ने हमें हमारी जमीनों से जबरन उठाने की कोशिश की तो इसके गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।

विस्थापन का कहीं पर जिक्र तक नहीं
कानड़ी गांव के प्रधान लक्ष्मण चंद ने कहा कि डीपीआर में विस्थापन का सही तरीके से जिक्र नहीं किया गया है और गांवों के लोगों का पुनर्वास कहां होगा, इसका भी कहीं जिक्र नहीं है। बसे बसाए गांवों को सरकार कहीं जंगलों में न बसा दे, यह डर लगता है। जहां खेती करना और अन्य व्यवसाय करना भी कठिन हो सकता है। सरकार अंत में ऐसा कदम भी उठा सकती है। विरोध के लिए सभी तैयार हैं।

विनाशलीला खेलना चाहती है सरकार
कानड़ी गांव निवासी जीवन प्रसाद ने कहा कि जिस तरीके से अखबार और टीवी समाचारों के माध्यम से ज्ञात हो रहा है कि बड़े बांध क्षेत्र में तबाही ला सकते हैं। बड़े बांध बनने से उस क्षेत्र की जमीन पर दबाव बढ़ता है, जिससे कि बड़े पैमाने के भूकंप आ सकते हैं तो फिर सरकार इतने बड़े बांध का निर्माण कर क्षेत्र में विनाशलीला खेलना चाहती है। बांध निर्माण का प्रबल विरोध होगा।
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