पौड़ी। पौड़ी की ऐतिहासिक रामलीला में महिला पात्रों के किरदार में न सिर्फ महिलाएं ही अभिनय कर रहीं हैं, बल्कि महिलाएं ही रामलीला के संगीत में संगत भी दे रहीं हैं। पहाड़ों में रामलीला के तहत इस प्रकार की शुरुआत सांस्कृतिक नगरी पौड़ी ने ही शुरू की।वर्ष 1897 से शुरू हुई पौड़ी की ऐतिहासिक रामलीला का इस बार 124वां मंचन आयोजित हो रहा है। तकनीकी के दौर में आज पौड़ी की रामलीला भी आधुनिक हो चुकी है। जहां संगीत में विभिन्न प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक वाद्ययंत्र शामिल हुए हैं तो महिला पात्रों का अभिनय भी महिलाएं ही करने के लिए बढ़ चढ़कर आगे आ रहीं हैं।
वरिष्ठ रंगकर्मी गौरीशंकर थपलियाल ने बताया कि महिला पात्रों के अभिनय का प्रयोग रामलीला समिति की ओर से वर्ष 2004 से शुरू किया गया। तब सीता के किरदार के लिए महिला पात्र को चुना गया। तब से महिला पात्रों का अभिनय महिलाएं ही कर रहीं हैं। आधुनिकता के दौर में इस प्रकार का प्रयोग काफी सफल भी रहा। अन्य जगहों पर रामलीला इसी तर्ज पर शुरू हो रही है।
रामलीला के 16 प्रमुख पात्रों में हैं महिलाएं
रामलीला समिति के मुताबिक पौड़ी की ऐतिहासिक रामलीला में 20 से 25 एकल व सामूहिक महिला किरदार शामिल हैं। जिसमें युवा व बाल्यावस्था सीता, कैकई, सुमित्रा, गौरी, तारा, सुलोचना, मंदोदरी, त्रिजटा, अहिल्या, शूर्पणखा व शबरी के साथ ही सखियों आदि किरदार शामिल हैं। इन सभी किरदारों में युवतियां ही अभिनय कर रही हैं।
रामलीला के पर्दे के पीछे हैं 25 महिलाएं
रामलीला के 124वें मंचन में करीब 25 महिलाएं पर्दे के पीछे से संगीत, पार्श्व गायन व नृत्य निर्देशक के रूप में कार्य कर रहीं हैं। समिति के मुताबिक नृत्य निर्देशन में 19, पार्श्व गायन में 5, रूप सज्जा में पुरुषों के साथ एक महिला भी प्रतिभा दिखा रही है। जबकि तबले पर कक्षा छह की समृद्धि भी पिता तपेश्वर प्रसाद के साथ संगत कर रही है।