महाशिवरात्रि को पौड़ी के श्री क्यूं कालेश्वर मंदिर में 10 हजार से अधिक श्रद्धालु पूजा पाठ करेंगे। मान्यता के अनुसार यमराज ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी। शिव ने यमराज को वर देकर कहा था कि कलियुग में मैं गुप्त रूप में प्रकट होऊंगा और मेरा नाम कंकालेश्वर, मुक्तेश्वर आदि होंगे। मैं कलियुग में उपासकों को भक्ति और मुक्ति प्रदान करूंगा।
महंत मुनि अभय चैतन्यानंद ने बताया कि मंदिर 173 साल पुराना है। उस समय यहां अंग्रेजों की हुकूमत थी। नेपाल से आए मुनि राम बुद्ध शर्मा व मित्र शर्मा इस जगह पर अपने बर्तन धोने के बाद रखते थे। उन्हें एक रात सपना आया कि यह स्थान यमराज की तपस्थली है, इसलिए यहां शिवलिंग स्थापित करें। इसके बाद अंग्रेजों ने यहां मंदिर निर्माण करवा दिया।
इसी दौरान केदारखंड में गणेश लिंग महाराज रावल को सपना आया कि बाहर शिवलिंग है, जिसे पौड़ी में बन रहे किंग कालेश्वर मंदिर में स्थापित किया जाए। रावल ने जब इस संबंध में जानकारी ली तो यह बात सही निकली। इसके बाद मंदिर में शिवलिंग स्थापित किया गया।