टिहरी जिले के कीर्तिनगर ब्लाक के लगभग 75 गांवों में 10 दिनों से पेयजल किल्लत बनी है। यहां लक्ष्मोली-हड़िमधार पेयजल योजना के पंप और मोटर फुंकने से जलापूर्ति ठप पड़ी है। लॉकडाउन के कारण संबंधित विभाग ने स्थानीय स्तर पर मोटर की मरम्मत का प्रयास किया लेकिन सफल नहीं हो पाया। ऐसे में लोग स्रोत और हैंडपंपों से पानी ढो रहे हैं।
अलकनंदा नदी से निर्मित लक्ष्मोली-हड़िमधार पंपिंग पेयजल योजना छह माह पूर्व पेयजल निगम से जल संस्थान को हैंडओवर हुई। इस योजना से पाटाखाल व हिसरियाखाल क्षेत्र के लगभग 75 गांवों को जलापूर्ति होती है, लेकिन 10 दिन पहले योजना के पंप और मोटर फुंक गई। तब से यहां की 20000 की आबादी को पेयजल संकट झेलना पड़ रहा है। लोग प्राकृतिक जल स्रोत और हैंडपंपों के सहारे पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। भंडाली गांव निवासी बदरी प्रसाद सेमवाल ने बताया कि लक्ष्मोली-हिंसरियाखाल मोटर मार्ग पर स्थित हैंडपंप से भी गंदा पानी आ रहा है। युवा जल संघर्ष मंच हिसरियाखाल के अध्यक्ष अजय सेमवाल का कहना है कि कई आंदोलनों के बाद पेयजल योजना की सौगात मिली थी, लेकिन उससे भी सुचारु रूप से पेयजल सप्लाई नहीं हो रही है।
लॉकडाउन की वजह से हो रही देरी : ईई
योजना की मरम्मत के लिए मुजफ्फरनगर से मैकेनिक को आना था, लेकिन लॉकडाउन के कारण वह नहीं आ पा रहा था। अब मैकेनिक का पास बनवा दिया गया है। वह बुधवार तक पहुंच जाएगा, जबकि नया पंप पहुंच चुका है। रोड हैड के गांवों में दो टैंकरों से जलापूर्ति की जा रही है, लेकिन सड़क से दूर के गांवों में समस्या बनी है। - राजीव सैनी, अधिशासी अभियंता जल संस्थान देवप्रयाग।