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रेलमार्ग परियोजना प्रभावितों का मौन व्रत

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श्रीनगर। ‘पैसा नहीं रोजगार दो’ की मांग के लिए आंदोलनरत रेलवे परियोजना प्रभावित नैथाणा व रानीहाट के ग्रामीणों ने एक घंटे का मौन व्रत रखकर सांकेतिक धरना दिया। हिमालय बचाओ आंदोलन के संयोजक समीर रतूड़ी ने कहा कि पहाड़ के संसाधनों के हिसाब से यहां विकास के मानक तलाशें जाने चाहिए, लेकिन सरकार सिर्फ पूंजीपतियों के फायदे को देखते हुए बनाती है।
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विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर नैथाणा में नैथाणा-रानीहाट रेलमार्ग परियोजना प्रभावित संघर्ष समिति और हिमालय बचाओ आंदोलन के बैनर तले महिलाएं एकत्रित हुईं। इस दौरान कहा गया कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग परियोजना में उनकी कृषि भूमि अधिग्रहित कर ली गई है, जिससे उनके समक्ष जीवन यापन की समस्या खड़ी हो गई है। उन्होंने रेलवे और प्रशासन से मुआवजे के बजाय स्थायी रोजगार की मांग की। आंदोलन के संयोजक समीर रतूड़ी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण कागजों तक ही सीमित है। कहा कि विकास पहाड़ की जरूरत है, लेकिन पर्यावरण दोहन के आधार पर नहीं। आज वक्त आ गया है कि जनता की विकास परियोजनाओं में भागीदारी हो। धरने में ग्राम प्रधान नैथाणा आशा देवी, संघर्ष समिति की अध्यक्ष रोशनी देवी, उर्मिला, रुक्मिणी, कलावती, सीरा देवी, लक्ष्मी, बबली मंद्रवाल, रजनी, संगीता और सुरेंद्र सिंह आदि बैठे। ब्यूरो
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