कीर्तिनगर। डागर पट्टी के राडागाड़-टोला ग्वाड़ क्षेत्र के लिए सड़क निर्माण नहीं होने से लोग नौ किलोमीटर पैदल चलने को मजबूर हैं। इस क्षेत्र के ग्रामीण मरीज को डंडी में रखकर रोड हेड तक पहुंचाते हैं। सड़क सुविधा नहीं होने से ग्रामीण पलायन कर रहे है। सड़क की मांग के लिए दो साल पहले ग्रामीणों ने तीन दिन तक घरों में चूल्हे भी नहीं जलाए थे।
विकास खंड कीर्तिनगर के राडागाड़, टोला व ग्वाड़ गांव की उत्तराखंड राज्य स्थापना के बाद से स्थिति खराब हुई है। यहां 15 वर्षों में 80 परिवार पलायन कर चुके हैं। पहले इन गांवों में 350 परिवार निवास करते थे। लोग बेहतर सुविधाओं की तलाश में गांव छोड़कर जा रहे हैं।
ग्रामीण बीरेंद्र सिंह बर्तवाल, मंजू देवी और विजय सिंह का कहना है कि छोटी सी बीमारी हो, तो लोगों को 55 किलोमीटर दूर श्रीनगर जाना पड़ता है। सबसे अधिक दिक्कत नौ किलोमीटर पैदल चलने में होती है। यह रास्ता घने जंगलों से गुजरता है। यदि पैदल दूरी कम हो जाए, तो सड़क मार्ग की दूरी इतनी नहीं खलती। सड़क न होने की वजह से लोग यहां रिश्ता करने में भी कतराते हैं।
वर्ष 2010 में राडागाड़- टोला ग्वाड़ क्षेत्र के लिए शासन ने 8 किमी सड़क मंजूर की , लेकिन यह सड़क आज तक फाइलों में कैद है। सड़क मार्ग के लिए वर्ष 2013 में गामीणों ने 12 दिन तक आमरण अनशन किया। मोटर मार्ग निर्माण के लिए ग्रामीणों ने वर्ष 2013 में 12 दिन तक आमरण अनशन भी किया था। दबाव बनाने के लिए तीन गांवों के लोगों ने तीन दिन तक अपने घरों में चूल्हे नहीं जलाए। उसके बाद पीएमजएसवाई खंड ने की डीपीआर तैयार की थी, लेकिन बात इससे आगे नहीं बढ़ पाई।
मंत्री और अधिकारी भी नहीं आते गांवों में
कीर्तिनगर। नेता लोग इन गांवों में वोट मांगने गए। सड़क बनाने का वादा भी किया, लेकिन विधायक और मंत्री बनने के बाद एक भी नेता इन गांवों में नहीं गया। वर्ष 2013 में तत्कालीन जिलाधिकारी रंजीत सिन्हा को भी इस गांव में रात बितानी थी। वह भी कीर्तिनगर से वापस हो गए।
राडागाड़- टोला ग्वाड़ मोटर मार्ग के लिए डीपीआर तैयार कर केंद्र सरकार को भेज दी गई है। अब तक विभाग को मोटर मार्ग निर्माण के लिए धनराशि नही मिली है।
- जेएस कंडारी, अधिशासी अभियंता, पीएमजीएसवाई कीर्तिनगर