श्रीनगर मे अलकनंदा नदी चेतावनी के निशान से ऊपर अलकेश्वर घाट हुआ जलमग्न
- फोटो : SHRINAGAR
ऊपरी क्षेत्रों में भारी बारिश से गंगा और अलकनंदा नदी चेतावनी स्तर को पार करते हुए खतरे के निशान तक पहुंच गई हैं। देवप्रयाग संगम पर अलकनंदा नदी के प्रचंड वेग से भागीरथी का प्रवाह कुछ देर के लिए रुक गया, जिससे भागीरथी नदी ने पीछे की ओर झील बन गई।
मंगलवार को सुबह लगभग 5 बजे श्रीनगर जल विद्युत परियोजना की झील के बैराज से पानी छोड़ा जाने लगा। इससे श्रीकोट, श्रीनगर, कीर्तिनगर और देवप्रयाग में अलकनंदा नदी उफान पर आ गई, जिससे स्नान घाट पानी में डूब गए। सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता एसएस चौहान ने बताया कि मंगलवार सुबह छह बजे श्रीनगर में अलकनंदा नदी का जल स्तर 535.70 मीटर रिकार्ड किया गया जो खतरे के निशान 536 मीटर से बस कुछ ही कम है। सात बजे के बाद जल स्तर कम होने लगा। अलकनंदा नदी का जल स्तर बढ़ने से रेलवे पुल का काम भी प्रभावित हुआ। वहीं देवप्रयाग संगम पर अलकनंदा नदी के प्रचंड वेग से भागीरथी का प्रवाह रुक गया, जिससे भागीरथी नदी ने पीछे की ओर झील बन गई है। कुछ घंटे बाद भागीरथी का वेग सामान्य हो गया। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार यहां गंगा 462 मीटर पर बह रही थी, जो खतरे के निशान से महज एक मीटर नीचे थी। इस मानसून काल में पहली बार अलकनंदा ने तोडेश्वर टापू को पार किया। नदियों का जल स्तर बढ़ने से देवप्रयाग में संगम, रामकुंड, फूलवाड़ी, बेलेश्वर, बेतालशिला घाट डूब गए।
चमोली तहसील में हुई सर्वाधिक बारिश
गोपेश्वर। सोमवार रात को चमोली तहसील के अंतर्गत सर्वाधिक बारिश रिकार्ड की गई है। यहां 105 मिमी वर्षा हुई। जोशीमठ में 22.4 मिमी, कर्णप्रयाग में 10 मिमी, पोखरी में 34 मिमी, थराली में 21 मिमी, गैरसैंण में 24 मिमी और घाट में 19 मिमी बारिश रिकार्ड की गई। जिले की प्रमुख नदियों में अलकनंदा का जल स्तर खतरे के निशान 957.42 मी के सापेक्ष 954.40 मी., नंदाकिनी का जल स्तर 871.50 मी के सापेक्ष 868.38 मी. और पिंडर नदी का जल स्तर 773 मी. के सापेक्ष 769.27 मी. तक बह रहा है। ये सभी नदियां खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं।