निजी शिक्षण संस्थानों की संबद्धता के मामले में सीबीआई के छापे के बाद गढ़वाल विश्वविद्यालय में हड़कंप मचा हुआ है। विवि के अधिकारियों और कर्मचारियों को सीबीआई की कार्रवाई की जानकारी शुक्रवार देर शाम मिली। हालांकि, शनिवार को विवि में अवकाश होने की वजह से विवि परिसर शांत रहा, लेकिन शिक्षक, अधिकारी व कर्मचारी यह जानकारी लेते रहे कि कौन-कौन कार्रवाई के दायरे में आया है।
वर्ष 2014 से 2016 के बीच तत्कालीन कुलपति, उनके ओएसडी और कुछ अधिकारियों के खिलाफ सीबीआई को शिकायत मिली थी कि उन्होंने निजी शिक्षण संस्थानों की संबद्धता मामले में गड़बड़ी की है। वर्ष 2016-17 में यह प्रकरण विवि में काफी चर्चाओं में रहा था। मामला इतना तूल पकड़ गया कि तत्कालीन कुलपति प्रो. जेएल कौल की विवि से तीन साल में ही विदाई हो गई। पिछले वर्ष सीबीआई ने गढ़वाल विवि को पत्र भेजकर विवि से संबद्ध संस्थानों मेें सीट वितरण में अनियमितता के मामले में 17 शिक्षकों और अधिकारियों के विरुद्ध जांच करने की अनुमति मांगी थी। कार्य परिषद की मई 2020 में आयोजित बैठक में केस दर्ज करने की अनुमति दे दी गई। इसके बाद नवंबर को आयोजित बैठक में जांच के दायरे में आए शिक्षकों और अधिकारियों के नामों का खुलासा किया गया था। लेकिन, विवि ने आरोपियों के नाम सार्वजनिक नहीं किए।
बताया जाता है कि इस प्रकरण में विवि के वरिष्ठ प्रोफेसर शामिल हैं। जबकि कुछ अधिकारी व प्रोफेसर रिटायर भी हो चुके हैं। यही वजह है कि पिछले साल से स्थानीय लोग और विवि के कर्मचारियों के बीच यह मसला चर्चा का विषय बना हुआ है। शनिवार को विवि के प्रशासनिक भवन के बंद रहने से अधिकारी व कर्मचारी एक दूसरे से फोन पर इस संबंध में चर्चा करते रहे। वहीं, कुछ शिक्षक और कर्मचारी मामले से संबंधित व्यक्तियों की जानकारी के लिए पत्रकारों के फोन भी घनघनाते रहे।