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ग्रीन कैंपस की अवधारणा को दिया जाएगा मूर्त रूप

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गढ़वाल केंद्रीय विवि के ग्रीन कैंपस और स्वस्थ शहर की अवधारणा को विश्वविद्यालय का हॉर्टीकल्चर इनिशिएटिव थू्र रेफोर्मिंग एक्टिविटी (चित्रा) प्रोग्राम के तहत बिड़ला परिसर के समीप वर्षों से बंजर पड़ी भूमि को विकसित किया जा रहा है।
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वर्तमान में नगर के आसपास पौधरोपण कर जंगल विकसित करने के लिए जमीन की भारी कमी होने की वजह से अगर विवि का यह प्रयास सफल हुआ, तो आने वाले दिनों में नगर के पास भी करीब 10 हेक्टेयर भूमि में एक मिश्रित वन भी स्थापित हो सकेगा। जो कि गढ़वाल विवि की कुलपति प्रो. अन्नपूर्णा नौटियाल का पर्यावरण के प्रति लगाव एवं शहर के दृष्टिकोण से चिंतन का परिणाम है। इस बंजर भूमि पर औषधीय पादपों के रोपण के साथ ही कम ऊंचाई पर उगाई जा सकने वाली सेब, आडू, अनार कंधारी, नाशपाती, पुलम मेरिपोसा, रेड बीयूट, सेंटा रोजा, पेरसिमन व कीवी एलिसन आदि फलदार पौधों के रोपण की तैयारी की जा रही है। हैप्रेक के वैज्ञानिक डा. विजय कांत पुरोहित ने बताया कि भूमि में डा. यशवंत सिंह परमार नौनी, सोलन एवं विलासपुर हिमाचल प्रदेश के किसान हरीमन शर्मा की ओर से तैयार की गई कम ऊंचाई पर उगाई जाने वाली सेब की प्रजातियों हरमन 99, अन्ना, डोरसेट गोल्डन तथा गेली गाला का रोपण किया जाएगा। सेब की ये प्रजातियां कम ऊंचाई पर उगाने के लिए ही बनाई गई हैं, जो कि तीन वर्ष से फल देना शुरू कर देती हैं। यदि पौधरोपण का यह कार्यक्रम सफल रहता है, तो आसपास के लोग भी इन प्रजातियों की पौधों का रोपण कर लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
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