डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा, पाकिस्तान सीमा पार से हथियार और विस्फोटक भेजने के लिए अब ड्रोन का ज्यादा इस्तेमाल कर रहा है। इसका खुलासा कुपवाड़ा, हीरानगर, कठुआ और राजोरी में हुई घटनाओं से हुआ है। आतंकियों के पास हथियारों की काफी कमी है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में जम्मू-कश्मीर में 200 से भी कम आतंकी रह गए हैं। पहले इनकी संख्या 350 के करीब थी। यह सुरक्षाबलों द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन का नतीजा है। डीजीपी ने कहा कि आतंकियों की घुसपैठ के लिए पाकिस्तान ने इस साल सीमा पार से गोलीबारी भी तेज कर दी है।
इस वर्ष के पहले सात महीनों में सीमा पार से 75 प्रतिशत अधिक गोलीबारी हुई है। 2019 में इसी अवधि में गोलीबारी की 487 घटनाएं हुई थीं। आतंकवाद की राह अपनाने वाले स्थानीय युवकों के बारे में डीजीपी ने कहा कि इस साल 80 युवा आतंकी संगठनों में शामिल हुए हैं। इनमें से 38 मारे गए और 22 गिरफ्तार किए गए हैं। अब सिर्फ 20 सक्रिय हैं। डीजीपी ने कहा कि 2020 में अब तक 150 आतंकी मारे गए, इनमें से 30 विदेशी हैं और 39 अन्य शीर्ष कमांडर हैं।
टेरर फंडिंग रोकने को टीएमजी का गठन
डीजीपी के मुताबिक जम्मू-कश्मीर पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय, आयकर विभाग और कुछ अन्य संगठनों के प्रतिनिधियों के साथ एक आतंकवाद निगरानी ग्रुप (टीएमजी) की स्थापना की गई है। यह ग्रुप आतंकियों और उनके समर्थकों की फंडिंग रोकने के लिए काम कर रहा है।