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स्वामी विवेकानंद की उत्तराखंड यात्रा को दर्शाया

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गढ़वाल विवि के चौरास परिसर में एक भारत श्रेष्ट भारत कार्यक्रम के तहत स्वामी विवेकानंद की टेलीफि? - फोटो : SHRINAGAR
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गढ़वाल विवि के पर्यटन विभाग की ओर से एक भारत श्रेष्ठ भारत कार्यक्रम के अंतर्गत स्वामी विवेकानंद की उत्तराखंड यात्राओं पर आधारित वृत्त चित्रों (डॉक्यूमेंट्री फिल्मों) का दूरदर्शन पर प्रसारण किया जाएगा। इससे पूर्व विवि स्तर पर दोनों डॉक्यूमेंट्री फिल्मों का प्रदर्शन किया गया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने इसे कसार देवी (उत्तराखंड) से कन्याकुमारी (तमिलनाडु) तक विवेकानंद दर्शन विस्तार के लिए प्रेरक पहल बताया है।
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गढ़वाल विवि ने कुमाऊं विवि के सहयोग से ‘हिमालय में विवेकानंद’ और ‘उत्तराखंड में पर्यटन परिपथ’ शीर्षक से दो वृत्त चित्र बनाए हैं। यह फिल्म केंद्रीय शिक्षा मंत्री निशंक की पुस्तक हिमालय में विवेकानंद पर आधारित हैं। विवि के पर्यटन परियोजना अधिकारी डा. सर्वेश उनियाल के निर्देशन में बनी इस फिल्म में लेखिका डा. शुचिस्मिता सेनगुप्ता पांडेय विवेकानंद की हिमालय यात्रा और इनसे जुड़े रहस्यों के बारे में बताती हैं। फिल्म में ऋषिकेश, राजपुर, अल्मोड़ा, लोहाघाट, मायावती व देवलधार व काकड़ीघाट आदि स्थानों को दर्शाया गया है। इन स्थानों की विवेकानंद ने यात्रा की थी। फिल्म के प्रदर्शन के मौके पर एक भारत श्रेष्ठ भारत के समन्वयक प्रो. ओके बेलवाल, सह समन्वयक डा. एसएस बिष्ट, डा. अजीत शर्मा, डा. सर्वेश उनियाल, मोहन नैथानी व विवेक कुंवर उपस्थित थे।
विवेकानंद पर्यटन पथ को विकसित करना जरूरी
श्रीनगर। चारधाम पर्यटन पथ के समान उत्तराखंड में विवेकानंद पर्यटन पथ को विकसित करने की पर्याप्त संभावनाएं हैं। इस पर्यटन पथ के माध्यम से सैलानी स्वामी विवेकानंद से जुड़ी यादों और आध्यात्म के बारे में जान सकते हैं। विवेकानंद ने अपने जीवन के महत्वपूर्ण दिन उत्तराखंड के पहाड़ों में गुजारे हैं, जिनके बारे में सैलानी जानना चाहते हैं। स्वामी विवेकानंद ने उत्तराखंड हिमालय में वर्ष 1888, 1890, 1897, 1898 एवं 1901 में भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने ऋषिकेश, हरिद्वार, देहरादून, नैनीताल, अल्मोड़ा, कर्णप्रयाग, श्रीनगर, टिहरी, और लोहाघाट आदि क्षेत्रों में प्रवास किया। इस बारे में ‘द फुट प्रिंट ऑफ विवेकानंद इन उत्तराखंड हिमालया’ पुस्तक मेें लेखिका डा. शुचिस्मिता सेनगुप्ता पांडेय ने विस्तार से वर्णन किया है।
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