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सुनो गौर से दुनिया वालों, चाहे जितना जोर लगा लो...

Tue, 03 Nov 2015 10:06 PM IST
लैंसडौन
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लैंसडौन महोत्सव की समापन संध्या धमाकेदार रही। दिल्ली के सांस्कृतिक ग्रुप पुष्पाजंलि ने अपने कार्यक्रम के जरिए देश की विविध संस्कृति के अनेकों रंग बिखेर सभी का मन मोह लिया। बाल कलाकार करन रावत ने अपने ग्रुप के साथ गढ़वाली गीतमाला की रंगारंग प्रस्तुति दी। बाल कलाकार के गीतों को सराहा गया। पुष्पाजंलि की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को देर रात तक पंडाल में जमे रहे।
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लैंसडौन महोत्सव की पांचवीं और अंतिम सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ हंस फाउंडेशन के उत्तराखंड प्रभारी पदमेंद्र बिष्ट टैगू ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस मौके पर उनके साथ ब्रिगेडियर इंद्रजीत चटर्जी, कैंट सीईओ राजीव कुमार, उपाध्यक्ष डॉ. एसपी नैथानी मौजूद थे। अपने संबोधन में पद्मेंद्र ने कहा कि संस्कृतियों के जिंदा रहने से ही मानव का अस्तित्व बना रह सकता है। उन्होंने कैट बोर्ड को एक वैन देने की घोषणा की।

सांस्कृतिक कार्यक्रम की शुरुआत बाल कलाकार करन रावत द्वारा ज्वालपा मइयां तेरी जयजयकार व भोला महादेवा जागर गीत के साथ हुई। दिल्ली की सांस्कृतिक संस्था पुष्पाजंलि द्वारा जयदेव जयदेव गणेश वंदना से हुई। इस मौके पर पुष्पाजंलि के मंजे कलाकारों द्वारा देशभक्ति पर आधारित वंदे मातरम, जय हो, सुनो गौर से दुनिया वालों, चाहे जितना जोर लगा लो, गीतों पर आधारित नृत्य की बेहतरीन प्रस्तुति के साथ हुआ।
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14 वर्षीय बाल गायक करन रावत ने गढ़वाली गीत प्रस्तुत कर लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींचा। बाल गायक ने तुम खुण सैल्यूट, सलाम करा हम, भुल भुल के हंसणू तेरू, धुत्या धुना धुन, सहित कई गीतों की प्रस्तुतियां दी। पुष्पाजंलि के मुख्य कलाकारों में अशोक सिंह राणा, अनीसजी, कल्पना, सन्नी, किरन, खुशी ने अपने नृत्य क्षमता व अभिनय की अमिट छाप छोड़ी।
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