पौड़ी। पटाखों का त्योहार दीपावली नदीजक आ रहा है। ऐसे में पटाखों की चपेट में आने से जलने की संभावना बनी रहती है। बच्चों का ख्याल रखने की जरूरत होती है। इसके अलावा पटाखों का धुआं मुंह, आंखों के अंदर जाने से व्यक्ति को सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। यह उनके स्वास्थ्य के लिहाज से खतरनाक है। वहीं जिला अस्पताल पौड़ी में बर्न यूनिट नहीं हैं। जिस वजह से क्रिटिकल मामलों के लिए मरीज को हायर सेंटर रेफर किया जाता है।
बच्चों में पटाखों का खासा क्रेज रहता है। बीते सालों में देखने में आया है कि पटाखों की चपेट में आने से बच्चे अधिक झुलसे हैं। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा अहम होती है। अस्पताल में तैनात सर्जन डाॅ. सुखवेंद्र के अनुसार दीपावली पर्व पर पटाखों से दूरी बनाई जाए, खासकर ग्रीन दिवाली मनाएं तो अच्छा होगा। उन्होंने बताया कि अस्पताल में पटाखों की चपेट आने से झुलसे लोगों के लिए डॉक्टरों की टीम मौजूद रहेगी, जो अस्पताल में आने वाले प्रत्येक मरीज का इलाज करेगी। उन्होंने बताया कि बर्न केस में मरीजों के लिए समुचित प्रबंध किए गए हैं। हालांकि शरीर के अधिक जलने पर या क्रिटिकल केस में मरीजों को हायर सेंटर ही जाना पड़ेगा। यहां बर्न यूनिट नहीं है।
इन बातों का रखें ख्याल
- पटाखे जलाते समय बच्चों के साथ अभिभावक मौजूद रहे।
- आग से बचाव वाले कपड़े पहनें।
- पटाखे जलाते समय पानी की बाल्टी आसपास रखें।