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स्मार्ट शहर की जगह स्मार्ट गांव किए जाए विकसित

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गढ़वाल विवि में ‘पर्यावरण पूरक स्वाभिमानी स्वरोजगार’ पर आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला में विशेषज्ञों ने लोगों को उद्यमिता से जुड़ी जानकारी दी। मुख्य अतिथि भारत सरकार के पूर्व सचिव डा. कमल टावरी ने शहरों की बदहाली को देखते हुए स्मार्ट शहर की जगह स्मार्ट गांव विकसित करने पर जोर दिया। इस दौरान उद्यमिता के क्षेत्र में काम करने वाले 15 लोगों को भी सम्मानित किया गया।
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बुधवार को स्व. इंद्रमणी जनसेवा संस्था मढी चौरास, पर्वतीय विकास शोध केंद्र व गढ़वाल विवि के मानव विज्ञान विभाग की ओर से बिड़ला परिसर के एसीएल हाल में प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें 200 युवाओं ने प्रतिभाग किया। इस मौके पर कार्यशाला में मुख्य अतिथि डा. कमल टावरी ने कहा कि गांव में ही व्यक्ति की रुचि क्षमता और योग्यता के अनुरूप रोजगार के अवसर सृजित किए जा सकते है। इसलिए अध्ययन करने के बाद ही नीति तैयार की जानी चाहिए। कार्यक्रम अध्यक्ष पूर्व कैबिनेट मंत्री डा. मोहन सिंह रावत गांववासी ने कहा कि गांवों में पर्याप्त प्राकृतिक संसाधनों के आधार पर लघु उद्योग स्थापित किए जाने चाहिए। अगर ग्रामीणों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध होगा तो पलायन पर भी रोक लगेगी। इंडो यूरोपियन कामर्स ऑफ स्याल एंड मिडियम इंटरप्राइजेज के निदेशक विजय तिवाड़ी ने कहा कि अब रोजगार के लिए भी जन जागरूकता की आवश्यकता है। इस मौके पर उद्यमिता के क्षेत्र में काम करने वाले प्रो. मोहित सेनी, प्रो. मोहन सिंह पंवार, डा. जितेंद्र बुटोला, विशाल विवेक, पूर्णानंद भट्ट, लक्ष्मण सिंह सजवाण, द्वारिका प्रसाद सेमवाल, सतेंद्र भंडारी, सुरेश भाई, अवतार सिंह नेगी, रघुवीर कंडवाल, स्वामी अद्वैतानंद, पूर्व डीआईजी एसएसपी चमोली, प्रणव उनियाल, विशाखा भट्ट को स्मृति चिह्न व सम्मान पत्र से पुरस्कृत किया गया। मौके पर उद्यमियों की ओर से अपने उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई। प्रशिक्षण कार्यशाला में कार्यक्रम संयोजक जयकृष्ण भट्ट, प्रो. विद्या सिंह चौहान व प्रो. अरुण बहुगुणा तथा कार्यक्रम संचालक डा. अरविंद दरमोड़ा आदि मौजूद थे।
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