कश्मीर घाटी में दहशतगर्द अब हमलों के लिए धर्मस्थलों का सहारा लेने लगे हैं। सोपोर में मस्जिद में छिपे आतंकियों ने सीआरपीएफ की पेट्रोलिंग पार्टी पर हमला कर इसे फिर साबित किया है। वैसे यह पहला मौका नहीं है, जब आतंकियों ने धर्मस्थल बदनाम करने की साजिश को अंजाम दिया है। 19 जून को भी पुलवामा जिले के पांपोर में हमला करने के बाद आतंकी मस्जिद में छिप गए थे। सुरक्षाबलों ने इन्हें बाहर निकाल कर मारा था। आम तौर पर आतंकी इस तरह की गतिविधियां 90 के दशक में अमल में लाते थे। बीच में यह सिलसिला बंद हो गया था।
दरअसल, कश्मीर घाटी में आतंकी मानसिक युद्ध भी लड़ रहे हैं। यह उनकी धर्मस्थलों की आड़ लेकर स्थानीय लोगों की भावनाओं से खेलने की साजिश भी है। इसलिए सुरक्षाबलों पर हमला करने से पहले व बाद वे धर्मस्थलों की शरण लेते हैं, ताकि इनकी जान बच जाए। यदि सुरक्षाबल कठोर कार्रवाई करें और इसमें धर्मस्थलों को नुकसान पहुंचे तो उसे धार्मिक रंग देकर लोगों को भड़काया जा सके।
19 जून को पुलवामा जिले के पांपोर के मीज इलाके में भी दहशतगर्दों ने ऐसी ही साजिश रची थी, परंतु सुरक्षाबलों ने अपनी सूझबूझ से इसे नाकाम कर दिया था। सुरक्षाबलों ने विशेष रणनीति के तहत मस्जिद को नुकसान पहुंचाए बिना आंसू गैस का प्रयोग कर आतंकियों को बाहर निकालकर ढेर कर दिया था। सुरक्षाबलों के इस ऑपरेशन की स्थानीय लोगों ने भी तारीफ की थी।