जम्मू विश्वविद्यालाय के मनोविज्ञान विभाग की एचओडी डॉ. आरती बख्शी और महिला कॉलेज परेड की सहायक प्रोफेसर पयाली अरोड़ा ने कैदियों को थेरेपी दी। इन्होंने बताया कि अनिद्रा गंभीर बीमारियों को लेकर सामने आती है। एक व्यक्ति को नींद पूरी करनी ही चाहिए। अनिद्रा की वजह से लंबे समय में व्यक्ति को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
कोविड का कोई मामला नहीं
डीजी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की 14 जेलों में बंद 3628 कैदियों में कोविड-19 का एक भी मामला नहीं है। अधिकारियों द्वारा उठाए गए एहतियाती कदमों के कारण ऐसा हो सका है। इस समय 150 नए कैदी जेल परिसरों में 14 दिन के क्वारंटीन में हैं। उन्होंने बताया कि जेल कर्मियों में भी कोराना का कोई मामला नहीं आया है। प्रदेश की जेलों की क्षमता 3232 कैदी रखने की है।