श्रीनगर। नगर क्षेत्र का सबसे बड़ा पुराने आईटीआई घाट पर लोगों को बुनियादी सुविधाएं न होने से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यहां शवदाह के लिए लकड़ी का टाल न होने से लोगों को भटकना पड़ रहा है। यह घाट श्रीनगर नगर क्षेत्र के अलावा पौड़ी जनपद के आधे हिस्से और आसपास के कई गांवों के लोगों के अंतिम संस्कार का प्रमुख स्थल है। रोजाना चार से पांच शव यहां आते हैं।
स्थानीय पार्षद हिमांशु बहुगुणा ने बताया कि 2013 की आपदा के बाद घाट की स्थिति सुधर नहीं पाई है। उस दौरान आई बालू और मलबा आज भी जस का तस पड़ा है। पहले यहां लकड़ी का टाल था, जहां लकड़ी उपलब्ध रहती थी और एक कर्मचारी भी तैनात रहता था, लेकिन अब न टाल है और न ही कोई व्यवस्था।
उन्होंने कहा कि रखरखाव के अभाव में घाट की हालत बदतर हो चुकी है और यह जगह अब नशेड़ियों का अड्डा बन गई है। शाम के समय कई युवक यहां नशा करते देखे जा सकते हैं। स्थानीय निवासी गजेंद्र मैठाणी ने बताया कि कई बार परिजनों को शव लेकर भटकते देखा है। लकड़ी न मिलने पर उन्हें तीन किमी. दूर अलकेश्वर घाट जाना पड़ता है, लेकिन कभी-कभी वहां भी लकड़ी नहीं मिलती। मजबूर होकर लोग कभी टायर जलाकर शवदाह करते हैं।
वहीं स्थानीय युवाओं सुमीत, मनोज और संतोष का कहना है कि प्रशासन को तत्काल घाट पर लकड़ी का टाल स्थापित करना चाहिए, ताकि अंतिम संस्कार के लिए आने वाले लोगों को परेशानी का सामना न करना पड़े।