श्रीनगर। राजकीय उप जिला चिकित्सालय श्रीनगर में दो बाल रोग विशेषज्ञ तैनात हैं लेकिन यहां नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू वार्ड) की व्यवस्था नहीं की गई है। ऐसे में गंभीर रूप से बीमार नवजात बच्चों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है। स्थानीय लोगों की ओर से चिकित्सालय में लंबे समय से एनआईसीयू वार्ड की मांग की जा रही है बावजूद इस ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।उपजिला चिकित्सालय स्थित बाल रोग विभाग में उपचार के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में बच्चे उपचार के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में गंभीर रूप से बीमार नवजातों कोउपचार देने के पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। ऐसे मामलों में बच्चों को श्रीनगर बेस अस्पताल, ऋषिकेश एम्स या फिर देहरादून रेफर करना पड़ता है। इससे तीमारदारों को समय की बर्बादी के साथ ही आर्थिक नुकसान भी झेलना पड़ता है। साथ ही बच्चों की जान का खतरा भी बना रहता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से अस्पताल में एनआईसीयू वार्ड स्थापित करने की मांग की जा रही है लेकिन अब तक कोई पहल नहीं हो सकी है। उन्होंने शासन और स्वास्थ्य विभाग से इस दिशा में जल्द कार्रवाई की मांग की है।
उपजिला चिकित्सालय का हाल ही में स्वास्थ्य निदेशक ने निरीक्षण किया था। इस दौरान उन्होंने यहां एनआईसीयू वार्ड की आवश्यकता बताई। जरूरत को देखते हुए चार वार्ड के एनआईसीयू वार्ड खोलने का विचार किया जा रहा है। इससे पहले यहां प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ की नियुक्ति हो इसका प्रयास भी किया जा रहा है।
विमल गुसाईं, सीएमएस, उपजिला चिकित्सालय श्रीनगर गढ़वाल।