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Pauri News: पौड़ी को आज भी है मंडलीय कार्यालयों के मुख्यालय से संचालन का इंतजार

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पौड़ी। गढ़वाल मंडल मुख्यालय को आज भी मंडलीय कार्यालयों के पौड़ी से संचालन का इंतजार है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने फरवरी 2023 में मंडलीय कार्यालयों के पौड़ी से संचालन की पहल की थी। पौड़ी की जनता ने उसे उम्मीद की नजरों से देखा था, लेकिन वह आज भी पूरी नहीं हो सकी है। कुछ समय पहले लोगों ने आंदोलन भी किया था। लेकिन परिणाम सकारात्मक नहीं मिला।



गढ़वाल मंडल की स्थापना 1 जनवरी 1969 को तत्कालीन यूपी के राज्यपाल डाॅ. बी गोपाल रेड्डी ने की थी। मंडल का मुख्यालय पौड़ी बनाया गया। इसमें पौड़ी के साथ चमोली, टिहरी, उत्तरकाशी चार जिले शामिल किए गए थे। इसमें वर्ष 1974 में देहरादून और 1997 रुद्रप्रयाग जिला जुड़ा। राज्य गठन के बाद हरिद्वार जिला भी गढ़वाल मंडल का हिस्सा बना। मंडलीय कार्यालयों का संचालन पूर्ण रूप से पौड़ी से होता था। लेकिन राज्य गठन के बाद एक-एक कर अधिकारियों ने मंडलीय कार्यालयों का संचालन कैंप कार्यालय के नाम से देहरादून से संचालित करना शुरू किया। वर्तमान में भी इसी परिपाटी पर चल रहे हैं। यहां कुछ कार्यालयों में अधिकारी नियमित रूप से बैठते हैं। जबकि चार कार्यालय पूर्ण रूप से देहरादून शिफ्ट हो चुके हैं। सीएम पुष्कर सिंह धामी ने फरवरी 2023 में पौड़ी के दो दिवसीय दौरे में मंडलीय कार्यालयों को पुनर्जीवित किए जाने की पहल की थी। वह पौड़ी के तीन-चार दौरे व एक मंडलीय समीक्षा बैठक भी कर चुके हैं। उनसे पहले भी प्रयास हुए हैं, लेकिन आज तक प्रदेश सरकार मंडलीय अधिकारियों को पौड़ी में बिठाने में असफल ही साबित रही है।
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पुरुषोत्तम को करते हैं लोग याद

बीवीआरसी पुरुषोत्तम 7 फरवरी 2019 से 1 जुलाई 2019 तक आयुक्त रहे। इस दौरान वे पौड़ी ही रहे। नियमित त्रैमासिक बैठकों का आयोजन, विभागवार मंडलीय समीक्षा बैठक, मंडल में शामिल जिलो का भ्रमण/निरीक्षण, मंडल स्तरीय विकास कार्यों का कलस्टर तैयार करने, न्यायिक कार्यों का संपादन भी पौड़ी से किया। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि मंडल की स्वर्ण जयंती पर दो दिवसीय आयोजन, पौड़ी में प्रदेश की पहली कैबिनेट बैठक का आयोजन रहा।



नित्यानंद के दौर में ही हो चुकी थी मंडल को निष्क्रिय करने की पहल



क्षेत्रीय मामलों के जानकार डाॅ. योगेश धस्माना बताते हैं कि राज्य गठन के साथ ही पहले मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी के दौर से ही मंडल को निष्क्रिय बनाने की पहल हो चुकी थी। स्वामी ने कहा था कि अब कमिश्नरी का औचित्य रह नहीं गया है। डाॅ. धस्माना ने बताया कि सरकार ने एक परीक्षण कराया था कि हिमाचल प्रदेश ने कमिश्नरियों को समाप्त कर दिया है। लेकिन राजनीतिक गतिरोध के चलते कमिश्नरी तो बनी रही, लेकिन उसे निष्क्रिय बना दिया गया है।



दून से चलते हैं राज्य स्तर के दो कार्यालय



पौड़ी में उत्तराखंड ग्राम्य विकास एवं पलायन निवारण आयोग और ग्राम्य विकास के राज्य स्तरीय मुख्यालय हैं। आयोग में उपाध्यक्ष व ग्राम्य विकास में आयुक्त नियमित रूप से नहीं बैठते हैं। इसके विपरीत कुमांऊ मंडल के हल्द्वानी में स्थापित सेवायोजन, समाज कल्याण, महिला डेयरी के राज्य स्तरीय कार्यालय मुख्यालयों से ही संचालित हो रहे हैं।

चार कार्यालय हो चुुके हैं शिफ्ट

- सहायक निदेशक खेल।



- उप निदेशक समाज कल्याण पौड़ी।

- मुख्य अभियंता ग्रामीण निर्माण विभाग पौड़ी।



- पुलिस अधीक्षक (क्षेत्रीय) अभिसूचना पौड़ी।

क्या कहते हैं लोग

यह आंदोलन की नगरी है, यहां से उत्तराखंड की उत्पत्ति हुई है। वर्तमान में शहर अपनी चमक खो चुका है। यह किसी भी सूरत में अच्छा नहीं है। मंडलीय कार्यालयों के पुनर्जीवित होने से पौड़ी के खो चुके वैभव को नया आयाम मिलेगा। -धर्मवीर रावत, शहरवासी



- सीएम की पहल को दो साल होने में कुछ ही माह रह गए हैं। इससे पहले भी प्रयास हुए हैं, लेकिन वे साकार रूप नहीं ले पाए। अब पौड़ीवासी इतने ठगे जा चुके हैं कि उन्हें न जाने क्यों यकीन नहीं हो रहा है। राज्य बनने के बाद सबसे ज्यादा नुकसान प्रदेश में पौड़ी को हुआ है। कोई राजनीतिज्ञ पौड़ी की नब्ज नहीं पकड़ पाया है, जो इसका समाधान निकाल सके। -गौरी शंकर थपलियाल, वरिष्ठ रंगकर्मी पौड़ी
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- मंडलीय अधिकारी-रोस्टर के अनुरूप कार्यालयों में नियमित बैठ रहे हैं। सबकी उपस्थिति सुनिश्चित की जाती है। आने वाले समय में इसे और मजबूती दी जाएगी। -विनय शंकर पांडेय, आयुक्त गढ़वाल मंडल
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