पार्टी प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा कि सख्त लोक सुरक्षा कानून के तहत हिरासत से रिहा किए जाने के बाद पार्टी नेताओं को लगातार नजरबंद रखा गया है। उन सदस्यों को राहत मुहैया कराने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटने का निर्णय लिया गया।
उन्होंने कहा कि किसी भी प्रशासनिक आदेश के बिना नजरबंदी गैरकानूनी है। यह मानव अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कमतर करती है। उम्मीद जताई कि अदालत से उनके सहयोगियों को राहत मिलेगी जो बिना किसी गलती के भी पांच अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370, और 35-ए के प्रावधानों को निरस्त करने के बाद से परेशानी झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए एकमात्र रास्ता बचा था। हमें उम्मीद है कि अदालत हमारे सहयोगियों की नागरिक स्वतंत्रता को बरकरार रखेगी जिनमें से अधिकतर की तबीयत ठीक नहीं है।