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जम्मू-कश्मीरः नजरबंद 16 नेताओं की रिहाई के लिए कोर्ट पहुंचे उमर और फारूक अब्दुल्ला

Tue, 14 Jul 2020 01:12 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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उमर अब्दुल्ला, फारूक अब्दुल्ला - फोटो : अमर उजाला
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नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) ने पिछले साल पांच अगस्त से नजरबंद पार्टी के 16 नेताओं की जल्द रिहाई का अनुरोध करते हुए जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। पार्टी द्वारा जारी बयान के अनुसार नेकां अध्यक्ष लोकसभा सदस्य डॉ. फारूक अब्दुल्ला, पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने वरिष्ठ नेताओं और पदाधिकारियों की नजरबंदी को चुनौती देते हुए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिकाएं दायर कीं।

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बयान के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने अली मोहम्मद सागर, अब्दुल रहीम राथर, नसीर असलम वानी, आगा सैयद महमूद, मोहम्मद खलील बंड, इरफान शाह और शमीमा फि रदौस की रिहाई के लिए याचिका दायर की है।
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पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मोहम्मद शफी उड़ी, आगा सैयद रूहुल्ला मेहदी, चौधरी मोहम्मद रमजान, मुबारक गुल, बशीर वीरी, अब्दुल मजीद लारमी, बशारत बुखारी, सैफुद्दीन भट और मोहम्मद शफी की नजरबंदी को चुनौती दी है। वरिष्ठ वकील शरीक रियाज ने दोनों नेताओं की ओर से याचिकाएं दायर की हैं।

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हिरासत से रिहा किए जाने के बाद किया गया नजरबंद- इमरान नबी डार

पार्टी प्रवक्ता इमरान नबी डार ने कहा कि सख्त लोक सुरक्षा कानून के तहत हिरासत से रिहा किए जाने के बाद पार्टी नेताओं को लगातार नजरबंद रखा गया है। उन सदस्यों को राहत मुहैया कराने के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटने का निर्णय लिया गया।

उन्होंने कहा कि किसी भी प्रशासनिक आदेश के बिना नजरबंदी गैरकानूनी है। यह मानव अधिकारों और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को कमतर करती है। उम्मीद जताई कि अदालत से उनके सहयोगियों को राहत मिलेगी जो बिना किसी गलती के भी पांच अगस्त 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370, और 35-ए के प्रावधानों को निरस्त करने के बाद से परेशानी झेल रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह हमारे लिए एकमात्र रास्ता बचा था। हमें उम्मीद है कि अदालत हमारे सहयोगियों की नागरिक स्वतंत्रता को बरकरार रखेगी जिनमें से अधिकतर की तबीयत ठीक नहीं है।
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