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बैकुंठ चतुर्दशी मेला: हास्य व्यंगों पर लोटपोट हुए दर्शक

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श्रीनगर बैकुंठ चतुर्दशी मेले मे सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिता मे प्रस्तुति से पूर्व कुछ इस ? - फोटो : SHRINAGAR
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बैकुंठ चतुर्दशी मेला एवं विकास प्रदर्शनी की तीसरी सांस्कृतिक संध्या पर दर्शक हंसी से लोटपोट हुए। मौका था बैकुंठ चतुर्दशी मेले में आयोजित गढ़-कुमांऊनी कवि सम्मेलन का। जहां पहुंचे गढ़वाल के विख्यात कवियों ने अपने हास्य व्यंगों से लोगों को खूब गुदगुदाया। इस दौरान कवियों ने राजनीतिक और सामाजिक व्यवस्थाओं पर तंज कसे। जबकि गायक व जन कवि नरेंद्र सिंह नेगी की कविताओं ने समा बांधा।
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मंगलवार रात को जीआईएंडटीआई मैदान में गढ़-कुमांऊनी कवि सम्मेलन का शुभारंभ कवयित्री नीता कुकरेती के गीत ‘अंधेरों चुकपट हुंयू च छिल्ला भी कखि हरची गैन’ से की गई। इसके बाद अन्य कवियों ने विभिन्न रस, छंद, अलंकार से परिपूर्ण अपनी व्यंग और हास्य कविताओं के माध्यम से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। कवि देवेंद्र उनियाल की कविता ‘वर्षी पहले जब मेरा गांव मां क्वी सुविधा नि छै त गौ छेड़ने की है बै कै बै नि छै’ ने पहाड़ के पलायन की पीड़ा को रखा। लोक गायक जन कवि नरेंद्र सिंह नेगी ने ‘गाणियो की गंगा स्याणियों का समुंदर छ मेरा मन मां’ से दर्शकों को मंत्र मुग्ध किया। गणेश कुकसाल गणी ने अपनी कविता छपैयली उन अखबार मा अपणा बुबा की फोटो कविता ने भी खूब तालियां बटोरी। ओम प्रकाश सेमवाल ने अपनी कविता ई व्यवस्था मां दम घुटेणु उठ खड़ा हिकमत करा समय बदल लू उठ खड़ा से व्यवस्थाओं पर चोट की। जबकि जगदंबा चमोला की कविता तू जोन सी जून्याली दल चकोर सी तेरी पतली कमर च मेरा पहाड़ मा, ऋषिकेश से पहुंचे हास्य व्यंग्य कवि नरेंद्र रयाल ने अपनी कविता एक सत्र छ होणू यख और एक सत्र च वख, रूपय्या फुखे गैन दुनियाभरा पर समस्या जख्या तख से सरकारों की कार्यप्रणाली पर जम कर तंज कसे। इसके अलावा हीरा सिंह राणा, धर्मेंद्र नेगी व संदीप रावत की कविताओं ने भी खूब वाहवाही लूटी। इस मौके पर कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ब्लाक प्रमुख प्रदीप थपलियाल, हीरा सिंह राणा पालिका अध्यक्ष पूनम तिवाड़ी, महेश गिरि व गंगा असनोड़ा आदि मौजूद थे। इस मौके पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे देवेंद्र उनियाल ने कहा कि सरकार को गढ़-कुमांऊनी, जौनसारी भाषा को आठवीं अनुसूची में दर्ज करना चाहिए। तभी भाषा और साहित्य जीवित रहेगा।
कवियों की कविताएं-
नरेंद्र रयाल--एक सत्र छ यख होणु , एक सत्र छ वख होणु, रूपया फुकेगिन दुनिया भरा का, और समस्या जखौ तख।
देवेंद्र उनियाल -- वर्ष पहली जब हमारा तुम्हारा गौं मा कुई सुविधा नी छ, त गौं छोडने की कै तै भी य है बै कै बै नी छ।
जगदंबा चमोला--लूटी तू जोन सी जुनियाली, चल चकोर सी तेरी पतली कमर, चल मेरा पहाड़ मा।
धर्मेंद्र नेगी - कमर अपणी मसगैकि देख, पकड़ी ठांटी रस गौ कि देख, बुज्याड़ा लग्या छन तेरी नशों मा, खडु हो अर घच कैकि देख।

श्रीनगर बैकुंठ चतुर्दशी मेले मे सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रतियोगिता मे प्रस्तुति देती स्कूली छात- फोटो : SHRINAGAR

श्रीनगर बैकुंठ चतुर्दशी मेले मे गढ़ कुमॉऊनी कवि सम्मेलन मे कविता पाठ करते कवि नरेन्द्र सिंह नेग?- फोटो : SHRINAGAR

श्रीनगर बैकुंठ चतुर्दशी मेले मे गढ़ कुमॉऊनी कवि सम्मेलन मे कविता पाठ करते कवि गणेश खुकशाल- फोटो : SHRINAGAR

श्रीनगर बैकुंठ चतुर्दशी मेले मे गढ़ कुमॉऊनी कवि सम्मेलन मे कविता पाठ करते कवि देवेन्द्र उनियाल- फोटो : SHRINAGAR

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