वर्ष 2013 में आए जलप्रलय से तबाह हुए आईटीआई (औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान) के नए भवन निर्माण के लिए निविदाएं आमंत्रित हो गई हैं। जबकि भवन निर्माण स्थल को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। भवन के लिए प्रस्तावित स्थल से ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल मार्ग भी गुजरेगा। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि रेल विकास निगम कितनी भूमि का प्रयोग करेगा और कितनी छोड़ेगा? ऐसे में यहां आईटीआई भवन के निर्माण पर संशय के बादल हैं।
जून 2013 में आई बाढ़ का पानी और मलबा लोअर भक्तियाना में घुस गया था। इससे यहां आईटीआई जलमग्न हो गई। आईटीआई का भूतल मलबे में दबे होने से कक्षाएं लोअर बाजार स्थित पंथ्या दादा आईटीआई में संचालित हो रही है।
आपदा से प्रभावित हुए आईटीआई के नए भवन को विश्व बैंक के आर्थिक सहयोग से बनाया जा रहा है। विश्व बैंक की गाइड लाइन के अनुसार भवनों का निर्माण आपदा प्रभावित क्षेत्र में नहीं किया जा सकता है। इसलिए तकनीकी शिक्षा विभाग ने पुरानी आईटीआई में खाली पड़ी जमीन का प्रस्ताव दिया है। इस पर विश्व बैंक ने सहमति जता दी, लेकिन यहां दिक्कत यह है कि अलकनंदा नदी पार स्थित रानीहाट से होते हुए रेल मार्ग यहां से भूमिगत होगा। तकनीकी शिक्षा विभाग को यह जानकारी नहीं है कि रेलवे कितनी भूमि का अधिग्रहण करेगा। सितंबर माह में इस मसले पर शासन स्तर में बैठक भी हुई थी। उसमें यह चर्चा हुई कि पुराने स्थान पर ही भवन निर्माण किया जाए। नदी की ओर सिंचाई विभाग ने सुरक्षा दीवार का निर्माण भी कर दिया है। इसलिए मलबे में दबे भवनों को ढहा कर बाढ़ के मलबे में भवन का निर्माण किया जा सकता है। इसके बावजूद उत्तराखंड आपदा पुर्न:प्राप्ति क्रियान्वयन इकाई की ओर से भवन निर्माण के लिए टेंडर आमंत्रित कर दिए गए हैं।
तीन मंजिला भवन का होना है निर्माण
श्रीनगर। आईटीआई का तीन मंजिला भवन प्रस्तावित है। इसकी लागत लगभग साढ़े 10 करोड़ रुपये आंकी गई है। यहां वर्कशॉप, कक्षा-कक्षों और कार्यालयों का निर्माण होना है।
पूर्व में भूगर्भ विज्ञानियों और लोनिवि के अभियंताओं ने मलबे में दबी आईटीआई का सर्वेक्षण किया था। भवनों को असुरक्षित बताया गया था। यह सुझाव दिया गया था कि मलबा हटाने के बजाय उसी के ऊपर भवन निर्माण हो सकता है। इस मसले पर शासन में विचार चल रहा है। - संजीव कुमार, प्रधानाचार्य आईटीआई श्रीनगर
लोअर बाजार में चयनित स्थान के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं। निर्माण स्थल के बदलाव के संबंध में शासन से कोई निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।- विकास बड़थ्वाल, उप परियोजना प्रबंधक पीआईयू