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पर्वतीय क्षेत्रों में मौन पालन की अपार संभावनाएं : चौधरी

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जिला उद्यान विभाग की ओर से क्षेत्र के ग्रामीण मौन पालकों को मधुमक्खी पालने और शहद निकालने का प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही उद्यमियों को मौन पालन के तौर तरीके एवं इस व्यवसाय से होने वाले लाभ के बारे में बताया गया।
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प्रशिक्षण कार्यशाला के मुख्य प्रशिक्षक नागेंद्र सिंह चौधरी ने कहा कि उत्तराखंड में मौन पालन लोगों को परंपरागत व्यवसाय रहा है, लेकिन धीरे-धीरे यह कम हो चुका है। जिसका मुख्य कारण भवनों के ढांचों में बदलाव, खेती का आकार कम होना, जंगल की आग व पर्यावरण रहा है। अब मधुमक्खी की कई प्रजातियां विकसित हो चुकी है। जो अच्छी खासी आमदनी दे रही है। पर्वतीय क्षेत्रों में मौन पालन की अधिक संभावनाएं हैं। कार्यशाला में अपर प्रशिक्षण अधिकारी (रसायन) आरएस बिष्ट, सचल दल प्रभारी बीएल आर्य व अपर प्रशिक्षण अधिकारी (उद्यान) पुरुषोत्तम बडोनी ने भी मौन पालकों को जानकारी दी।
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