श्रीनगर। साहित्यिक मंच कविता कारवा ने अपनी दस वर्ष की सफल यात्रा पूरी कर ली है।
इस अवसर पर अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के सभाकक्ष में आयोजित गोष्ठी में प्रतिभागियों ने कविताओं का पाठ कर समां बांध दिया।
राजेन्द्र कपरुवाण ने महादेवी वर्मा की मैं नीर भरी दुख की बदली, अजय प्रकाश चौधरी ने डॉ. दीपक द्विवेदी के काव्य संग्रह मैं प्रेम हूं से चयनित पंक्तियां, जबकि शम्भू प्रसाद भट्ट ‘स्नेहिल’ और पार्षद प्रवेश चमोली ने अयोध्या सिंह उपाध्याय की प्रिय प्रवास से अंश प्रस्तुत किए।
सुशांत मेनका मिश्रा ने निराला की प्रसिद्ध कविता वह तोड़ती पत्थर का प्रभावी पाठ किया वहीं माधुरी नैथानी ने उदय प्रताप सिंह की हम किसको दोषी ठहराएं सुनाई। वीरेन्द्र रतूड़ी ‘बिट्टू’ ने मधुर स्वर में गजल पेश कर माहौल को सुरमय बना दिया।
इसके अलावा अनीता नौडियाल ने चिड़िया का गीत, गणेश बलूनी ने बाबा नागार्जुन की बाघ आया उस रात, कौशल्या नैथानी ने अटल बिहारी वाजपेई की रचना अपने ही मन से कुछ बोलें तथा शिव सिंह नेगी ने जसवीर सिंह हलधर की रचना का पाठ किया। अंत में विमल बहुगुणा ने सूरदास के पदों और नीरज नैथानी ने जनवादी कविता से श्रोताओं को भावविभोर किया।