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गढ़भोज बने राज्य की पहचान, देश-विदेश तक पहुंचे स्वाद

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श्रीनगर में पत्रकारो से वार्ता करते गढ़भोज अभियान के सदस्य - फोटो : SHRINAGAR
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गढ़भोज और बीज बम अभियान चला रहे हिमालय पर्यावरण जड़ी-बूटी एग्रो संस्थान जाड़ी (उत्तरकाशी) के सचिव द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने सरकार को गढ़भोज प्रोत्साहन योजना संचालित करने का सुझाव दिया है। कहना है कि मिड डे मील के साथ ही चारधाम यात्रा रूट पर स्थित रेस्टोरेंट-होटलों के मेन्यू में गढ़भोज शामिल किया जाए। जिससे स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलने के साथ ही उत्तराखंड के पौष्टिकता से भरपूर भोजन का स्वाद देश-विदेश के लोग ले भी सकेेंगे।
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यहां आयोजित पत्रकारवार्ता में द्वारिका प्रसाद सेमवाल ने कहा कि अगर हम स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने के साथ ही अपनी संस्कृति व सभ्यता को जीवित रखना चाहते है तो गढ़भोज को एक बड़ा रूप देने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2021 को गढ़भोज वर्ष के रुप में मनाया जा रहा है। वर्ष 2001 से यह अभियान चल रहा है। वर्तमान में राज्य के कई स्कूलों में स्वैच्छिक रुप से सप्ताह के एक दिन गढ़भोज बनाया जा रहा है। पुलिस कैंटीनों व मैस में भी एक दिन गढ़भोज परोसा जाता है। इसमें स्थानीय दाल, सब्जियां व अनाज शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में लगभग 17 हजार स्कूल हैं। इन स्कूलों में मिड डे में गढ़भोज बनाया जा सकता है। इसके लिए बाहरी बाजार से सब्जी, दाल एवं अनाज खरीदने के बजाय स्थानीय स्तर पर ही खरीद हो। चार धाम यात्रा रूट पर स्थित रेस्टोरेंट-होटलों के मेन्यू में गढ़भोज शामिल किया जाए। सभी सरकारी कैंटीनों में गढ़भोज को शामिल किया जाना चाहिए। इस अवसर पर गढ़वाल विवि के मानव विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विद्या सिंह चौहान और पर्वतीय विकास शोध केंद्र के नोडल अधिकारी डा. अरविंद दरमोड़ा मौजूद थे।
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