मवाकोट स्थित दशकों पुराने गेंद मेले मैदान को वन भूमि में बताते हुए वन विभाग ने दीवार निर्माण पर रोक लगा दी है। जिससे गेंद मेला समिति समेत क्षेत्रीय ग्रामीण भड़के हुए हैं। उन्होंने वन विभाग पर अनावश्यक परेशान करने का आरोप लगाया है।
ग्रामीणों ने कहा कि वन विभाग और राजस्व विभाग से गेंद मेला मैदान का संयुक्त निरीक्षण करने की मांग की गई है, लेकिन हर बार वन विभाग इसे टाल देता है। ग्रामीणों का दावा है कि गेंद मेला मैदान ग्रामीणों के नापखेत की जमीन में है।
शंकरदत्त जोशी गेंद मेला एवं क्षेत्रीय विकास समिति के अध्यक्ष हरेंद्रमणि जोशी, सचिव गजेंद्र सिंह रावत, शांति थापा समेत कई ग्रामीणों की मौजूदगी में समिति ने मंगलवार को गेंद मेला मैदान के पूर्वी भाग में दीवार निर्माण का कार्य शुरू ही कराया गया था कि वन विभाग के कर्मचारियों ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवा दिया।
वन विभाग ने गेंद मेला मैदान को वन भूमि बताते हुए किसी भी तरह के निर्माण न करने की बात कही। विवाद की स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों और समिति के पदाधिकारियों ने राजस्व और वन विभाग से संयुक्त निरीक्षण की मांग की थी। एसडीएम के आदेश के बावजूद वन विभाग संयुक्त निरीक्षण के लिए नहीं पहुंच रही है।
बुधवार को ग्रामीणों ने बैठक कर 28 नवंबर तक संयुक्त निरीक्षण कर मामले का हल न निकलने पर 29 नवंबर से दीवार निर्माण करने और वन विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलने का निर्णय लिया। कहा कि गेंद मेला मैदान की 0.420 हेक्टेयर नापखेत भूमि जोशी बंधुओं की है, जो उन्होंने दशकों पूर्व गेंद मेले के लिए दी हुई है। क्षेत्र में असामाजिक तत्वों का जमावड़ा और गंदगी को देखते हुए समिति ने मैदान में दीवार निर्माण का निर्णय लिया है। इस मौके पर सतेश्वरी देवी, संतोष जोशी, पप्पू खैरवाल, बलदेव सिंह नेगी, पितृशरण जोशी, हर्षवर्धन बिंजोला और प्रमोद डोबरियाल आदि मौजूद थे।
मवाकोट में नहर वन एवं नापखेत भूमि की सीमा है। नहर से सटकर वन विभाग के वर्षों पुराने सीमांकन के मुनारे लगे हुए हैं। मैदान वन भूमि में है। वन भूमि में किसी भी तरह का निर्माण नहीं होने दिया जा सकता है।
-एसपी कंडवाल, रेंज अधिकारी कोटद्वार।