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कश्मीर के सेब की बिक्री और ट्रांसपोर्टेशन का रोड मैप तैयार

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श्रीनगर। विश्व प्रसिद्ध कश्मीरी सेब पर एक बार फिर से मौसम के साथ-साथ कोरोना की मार पड़ी है। हॉर्टिकल्चर विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस वर्ष के उत्पादन में करीब 20 प्रतिशत की गिरावट की संभावना है। वहीं प्रदेश सरकार ने सेब उत्पादकों के लाभ के लिए केंद्र सरकार से इस वर्ष भी मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (एमआईएस) लागू करने की सिफारिश की है। अधिकारियों का कहना है कि पूरी संभावना है कि केंद्र सरकार इस योजना से किसानों को लाभ पहुंचाएगी।
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सरकार ने सेब की पैदावार से लेकर उसकी बिक्री और ट्रांसपोर्टेशन तक के इंतजाम का रोडमैप तैयार कर लिया है। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले वर्ष करीब 22 लाख मीट्रिक टन पैदावार हुई थी। इस बार कमी की संभावना है। इसके पीछे दो मुख्य कारण है। एक अप्रैल-मई के महीने के दौरान खराब मौसम और राजस्थान के मधुमक्खी पालकों का कश्मीर में कोरोना के चलते घाटी नहीं पहुंच पाना, जिसके चलते पॉलीनेशन में काफी दिक्कत पेश आई।
हॉर्टिकल्चर विभाग के निदेशक एजाज अहमद भट ने बताया कि इस बार भी हमने प्रदेश सरकार से किसानों के लिए एमआईएस को लागू करने की सिफारिश की है। प्रदेश सरकार ने इसके लिए केंद्र को लिखा है। भट ने कहा कि सेब उत्पादकों की मांग है कि एमआईएस में ग्रेडिंग में रियायत देनी चाहिए ताकि किसानों को अच्छा दाम मिल सके। भट के अनुसार विभाग ने प्रशासन और ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर सेब की ट्रांसपोर्टेशन का भी पूरा प्लान बनाया है। सबसे पहले हाइवे पर सेब से लदे ट्रकों की क्लियरेंस की जाएगी क्योंकि ज़्यादा देर तक रास्ते में फंसे रहने पर सेब खराब होने की संभावना होती है।
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देश के बाहर निर्यात करने पर जोर
इसके अलावा कश्मीरी सेब को देश के बाहर भी निर्यात करने की प्रक्रिया पर जोर दिया जा रहा है। पिछले साल कुछ देशों में इसे भेजा गया था जहां इसके स्वाद को काफी पसंद किया गया था और अब बाहर की कंपनियों की तरफ से जबरदस्त डिमांड है। भट ने कहा, पिछले साल मुंबई में हमारा सेब 90 रुपये प्रति किलो के हिसाब से बेचा गया था। वहां से वो दुबई ले जाया गया था। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हमारे सेब के स्वाद की तारीफ हुई। हमने एक बायर-सेलर ग्रुप भी बनाया है।
वही अगर जेएंडके स्टेट्स इकोनॉमिक सर्वे 2017 पर नजर डालें तो 3-4 लाख हेक्टेयर भूमि पर फलों की खेती होती है जिसमें सेब उगाने के लिए 48 प्रतिशत का उपयोग किया जाता है। यह लगभग 34 लाख लोगों या कश्मीर में लगभग सात लाख परिवारों को पालता है। कश्मीर के हॉटीकल्चर को कश्मीर की आर्थिक व्यवस्था की रीढ़ की हड्डी माना जाता है।
कोल्ड स्टोर होने से पूरा साल मिलेगा
एक किसान नजीर अहमद ने बताया कि कश्मीर का सेब दुनिया भर में अपने स्वाद के लिए मशहूर है और इसकी शेल्फ लाइफ बहुत ज्यादा लेकिन अगर कोल्ड स्टोर होंगे तो यह सेब साल भर मिल पाएगा। नज़ीर के अनुसार इस बार सेब की क्वालिटी अच्छी है लेकिन उत्पादन कम है, अब उम्मीदें सरकार से है। सरकार को ट्रांसपोर्टेशन की सुविधा पर ध्यान देना होगा। वहीं एक अन्य किसान शाहिद का कहना है कि उम्मीद है कि इस बार भी भाव अच्छा मिलेगा और सरकार मंडियों में सही से कोविड एसओपी को जमीनी स्तर पर लागू कर पाएगी ताकि किसान को संक्रमण का खतरा न हो।
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