राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में मल्टी ड्रग्स रजिस्टेंट (एमडीआर) टीबी मरीजों के लिए डीआरटीबी (ड्रग्स रजिस्टेंट ट्यूबरक्लोसिस) सेंटर स्थापित हो गया है। केंद्र मेें पुरुष व महिलाओं के लिए अलग-अलग वार्ड बनाए गए हैं।
क्षय रोग (टीबी) से पीड़ित मरीजों के उपचार के लिए सरकार ने विभिन्न स्थानों मेें डॉटस केंद्र स्थापित किए हैं, लेकिन कई मरीज बीच में दवाई छोड़ देते हैं। इससे वह दोबारा टीबी के शिकार हो जाते हैं। इन मरीजों पर फिर टीबी की सामान्य दवाइयां काम नहीं करती हैं। इन मरीजों को एमडीआर कहा जाता है।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सीएम रावत ने बताया कि इनके उपचार के लिए डॉक्टरों की निगरानी में विशेष दवाइयां देनी पड़ती हैं, लेकिन दवाओं के साइड इफेक्ट भी हो सकते हैं। इसलिए अस्पताल में भर्ती कर लगभग 10 दिन तक मरीज का परीक्षण किया जाता है, जब वह दवाई के अनुकूल ढल जाता है, तब उसको अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है। तत्पश्चात घर में रहकर उसकी दवाई चलती है। कॉलेज से संबद्ध बेस अस्पताल में डीआर टीबी सेंटर बनाया गया है। इसमें दो वार्ड बनाए गए हैं। सेंटर के लिए एक एमबीबीएस डॉक्टर को नियुक्त किया जा रहा है।