बावरिया गिरोह के सात वन्य जीव तस्कर कार्बेट टाइगर रिजर्व से सटे यूपी के एक गांव में शिकार के फिराक में डेरा डाले हुए थे।
लैंसडौन वन प्रभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की सजगता से टीम को दबोच लिया गया है।
उनके पास से छह खड़के भी बरामद कर लिए गए, जिसे वे गुलदार या बाघ को मारने के लिए इस्तेमाल करते हैं।
तीन दिन पहले हरियाणा और पंजाब से चले बावरिया गिरोह केसात सदस्य जैसे ही नजीबाबाद के इलाके में पहुंचे, वैसे ही लैंसडौन वन विभाग के अधिकारियों को मुखबिर से सूचना मिल गई। बावरिया की दस्तक से वन अधिकारियों में हड़कंप मच गया। शनिवार दिन में डीएफओ नितिशमणि त्रिपाठी
, एसीएफ जेएस रावत और रेंजर एसपी कंडवाल की अगुवाई में टीम मुखबिरों को साथ लेकर नजीबाबाद होते हुए धामपुर पहुंची।
यहां शेरकोट के पास खिर्जूपुर गांव में डेरा डाले सातों लोगों को दबोच लिया गया। डीएफओ ने बताया कि इस गिरोह का सरगना रामचंद्र पुत्र नत्थू गाजियाबाद के मसूरी गांव का रहने वाला है।
जबकि महिला जेना इलिया जानकी, मंगतियार पुत्र लालचंद, सीताराम पुत्र जिल्लूराम निवासी सूरजपुर पंचकूला हरियाणा के रहने वाले हैं।
इस गिरोह में रमेश पुत्र हरमल निवासी बद्दी हिमाचल प्रदेश, हरपाल पुत्र रामजीलाल निवासी लुधियाना और करण सिंह पुत्र छोटन सिंह निवासी खिर्जूपुर जिला बिजनौर यूपी का निवासी है। लैंसडौन की टीम ने सातों को बिजनौर सामाजिक वानकी वन प्रभाग को सौंप दिया। सूचना मिलते ही कार्बेट टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक डा. साकेत बडोला भी धामपुर पहुंच गए हैं।