पौड़ी। गढ़वाल मंडल में भी महिलाएं सुरक्षित नहीं है। पुलिस के हालिया आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं। पुलिस रिकार्ड के मुताबिक दहेज हत्या, बलात्कार, घरेलू हिंसा के मामलों में पिछले वर्षों की अपेक्षा डेढ़ गुना बढ़ोत्तरी हुई है। आंकड़े सामने आने के बाद पुलिस केे माथे से पसीना टपकता नजर आ रहा है। डीआईजी गढ़वाल ने भी महिला अपराधों पर नकेल कसने के लिए पुलिस अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं।
गढ़वाल मंडल के सात जिलों में पिछले तीन वर्षों के आपराधिक आंकड़ों पर नजर डालें तो इनमें सबसे अधिक महिला अपराधों में इजाफा हुआ है। महिला अपहरण के मामलों पर नजर डालें तो 2015 में 171, 2016 में 179 तो 2017 में अब तक 238 मामले दर्ज हो चुके हैं। दहेज हत्या में 2015 में 32, 2016 में 25 और 2017 में अब तक 34 मामले दर्ज हुए हैं। बलात्कार के मामलों में 2015 में 148, 2016 में 179 तो इस साल अब तक 224 मामले दर्ज हो चुके हैं।
महिला अपराधों में हरिद्वार जिला पहले और देहरादून दूसरे स्थान पर रहा है। इस साल हरिद्वार में 126 महिला अपहरण, 15 दहेज हत्या और 107 बलात्कार के मामले दर्ज हुए हैं। वहीं देहरादून में महिला अपहरण के 58, दहेज हत्या के 13 और बलात्कार के 81 मामले सामने आए हैं। गढ़वाल मंडल में अन्य अपहरण, लूट, बलवा, वाहन चोरी आदि के मामले भी पहले से ज्यादा बढ़े हैं। अन्य अपहरण में जहां 2015 में जहां 99, 2016 में 95 तो इस साल 102 मामले दर्ज हो चुके हैं। वहीं दूसरी ओर अन्य लूट में 2015 में जहां 34, 2016 में 49 तो इस साल 100 मामले दर्ज हो चुके हैं। डकैती में 2015 और 2016 में 6-6 मामले सामने आए तो इस साल सात मामले दर्ज हो चुके हैं।
वाहन चोरी के मामलों में 2015 में 428, 2016 में 461 तो 2017 में 568 मामले दर्ज हो चुके हैं। चैन स्नेचिंग के मामले भी 2015 में 13, 2016 में 13 तो इस साल 27 मामले सामने आए हैं।
हत्या की घटनाओं में मामूली गिरावट
वाहन लूट और हत्या की घटनाएं कुछ हद तक पहले से कम हुई हैं। वाहन लूट में 2015 में 11, 2016 में 13 तो इस साल आठ मामले दर्ज हुए हैं। हत्या में 2015 में 92, 2016 में 94 और इस साल अभी तक 91 मामले दर्ज हुए हैं। जबकि फिरौती के मामले इस साल शून्य रहे हैं। 2015 में जहां फिरौती की 3 तो 2016 में 2 घटनाएं दर्ज हुई थीं।