श्रीनगर। रचनात्मक क्रियाकलापों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से खंडाह में आयोजित उलार कैंप के तीसरे दिन संगीतकार व शिक्षक डाॅ. सुभाष पांडेय ने बच्चों को उत्तराखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति के तहत अपनी लोकसंस्कृति, लोक पंरपराओं, बोली-भाषाओं के संवर्धन एवं संरक्षण के प्रचार-प्रसार में कार्य किया जा रहा है।
डाॅ. पांडेय ने लोकभाषा व लोक परंपराओं में प्रचलित थड़िया, चौंफला, चैती गीत, झूमेला, बाजूबंद एवं नंदा देवी के परंपरागत गीतों के बारे में बच्चों को जानकारी दी। उन्होंने यो मासी को फूल, सतवंती माता झमाको, ग्वीराल फूल फूलीगे, एगेन दादू झुमैलो आदि गीत गाकर आयोजन को सफल बनाया। इस अवसर पर गढ़कवि देवेंद्र उनियाल ने अपनी दो रचनाओं बोई व ढूगू के माध्यम से लोकभाषा से परिचय कराते हुए उसके प्रचार प्रसार के लिए बच्चों को प्रेरित किया। शिक्षक प्रदीप रावत ने बच्चों को स्क्रेच पेंटिंग की विधाओं से अवगत कराया। संवाद