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एक कदम और आगे बढ़ा एलपीजी बॉटलिंग प्लांट

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कोटद्वार। सब कुछ ठीक रहा तो गढ़वाल के इंडियन ऑयल कारपोरेशन (आईओसी) के एलपीजी वितरकाें को गैस सिलेंडरों की सप्लाई के लिए काशीपुर और बहादराबाद स्थित प्लांटों पर निर्भर नहीं रहना पडे़गा। उत्तराखंड शासन और पौड़ी प्रशासन के प्रस्ताव पर आईओसी के कारपोरेट आफिस नोएडा से यहां पहुंचे अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को गैस बॉटलिंग प्लांट के लिए सिगड्डी के जयदेवपुर गांव में चयनित जमीन का स्थलीय निरीक्षण किया। अधिकारी अपनी रिपोर्ट आईओसी के टॉप मैनेजमेंट को सौंपेंगे। रिपोर्ट सकारात्मक रही तो बहुत जल्द ही आईओसी के मुंबई स्थित आफीस से जमीन पर प्लांट लगाने की संभावनाएं तलाशने के लिए उच्चस्तरीय दल यहां मुआयने के लिए आएगा।
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कोटद्वार क्षेत्र में एलपीजी बॉटलिंग प्लांट लगाने की कवायद तेज हो गई है। आईओसी के चीफ एलपीजी मैनेजर आरके वर्मा और सीनियर इंजीनियरिंग मैनेजर एसके सुलतान ने यहां पहुंचकर एसडीएम जीआर बिनवाल के साथ मीटिंग की। एसडीएम ने उन्हें सिगड्डी सिडकुल के पास जयदेवपुर गांव में चयनित राजस्व विभाग की जमीन दिखाई। आईओसी के दोनों अधिकारियों ने पूरे इलाके का भ्रमण कर रोड एप्रोच, सुरक्षा, पानी, मिट्टी का जायजा लिया।
एसडीएम ने बताया कि सिगड्डी में करीब 25 एकड़ जमीन का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था। यह क्षेत्र सिगड्डी में सिडकुल के औद्योगिक क्षेत्र से एकदम सटी हुई है। यह जमीन अभी बंजर पड़ी है, जिसपर करीब दो सौ पेड़ कुकाट के खडे़ हैं। इस जमीन को पहले ग्रोथ सेंटर के विस्तारीकरण के लिए प्रस्तावित किया गया था, जिसे जरूरत के हिसाब से एलपीजी प्लांट के लिए प्रस्तावित कर दिया गया है। एसडीएम के अनुसार जयदेवपुर गांव की यह जमीन श्रेणी पांच में राज्य सरकार के नाम दर्ज है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह है कि यह जमीन कोटद्वार-लालढांग-हरिद्वार मोटर मार्ग पर सिडकुल से सटा क्षेत्र है। इस मौके पर सिद्धबली गैस एजेंसी की मालिक अनीता आर्य और सुनील कुमार भी मौजूद थे।
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उपभोक्ताओं को मिलेगी राहत
कोटद्वार में एलपीजी गैस बॉटलिंग प्लांट लगने से गैस वितरकों को ही नहीं उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी। गैस वितरकों को अभी तक जरूरत के मुताबिक गैस सिलेंडरों की सप्लाई नहीं मिल पाती। जिसके चलते पूरे गढ़वाल में बारहों महीने गैस की किल्लत बनी रहती है। पौड़ी जिले के कई इलाके तो ऐसे हैं जहां चार-चार महीने तक गैस की गाड़ी नहीं पहुंचती। कोटद्वार में प्लांट लगने के बाद गैस एजेंसियों को जरूरत के मुताबिक सिलेंडर मिल पाएंगे।
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वर्ष 2011 में मिली थी मंजूरी
आईओसी वर्ष 2011 में ही गढ़वाल के प्रवेश द्वार कोटद्वार में एलपीजी बॉटलिंग प्लांट की मंजूरी दे चुका था। तब से जमीन उपलब्ध कराने के लिए शासन, प्रशासन और सिडकुल के साथ पत्राचार चल रहा था। लेकिन गंभीरता से प्रयास न होने के कारण प्लांट लगाने की योजना परवान नहीं चढ़ पा रही थी।
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