पौड़ी। धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं समेटे सीता माता की धरती सितोनस्यूं अब तक नीति नियंताओं की नजरों में नहीं आया है। महर्षि वाल्मीकि और सुमित्रा नंदन लक्ष्मण के पौराणिक मंदिर भी यहां उपेक्षा का ही दंश झेल रहे हैं।
केदारखंड में वर्णित कथा के अनुरूप वनवास से वापस लौटने के बाद श्री राम ने जब माता सीता का त्याग किया तो वह भगवान वाल्मीकि के आश्रम में रही। कोट क्षेत्र में भगवान वाल्मीकि का पौराणिक मंदिर इस बात की तस्दीक करता है। कहा जाता है कि सीता माता की धरती होने से इस क्षेत्र का नाम सितोनस्यूं पड़ा। लक्ष्मण का भव्य मंदिर भी इसी सितोनस्यूं क्षेत्र में है। कोट में हर वर्ष सीता माता की याद में फलस्वाड़ी में भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। कहा जाता है कि अगिभन परीक्षा के बाद माता सीता धरती की गोद में समा गई थी। वाल्मीकि मंदिर के संरक्षण के लिए पुरातत्व विभाग ने प्रयास किए लेकिन इस धरोहर को लेकर भी औपचारिकता ही पूरी हुई।