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निरीक्षण नजदीक, समाधान दूर

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श्रीनगर। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली आयुर्विज्ञान एवं शोध संस्थान में एमबीबीएस पांचवें सत्र तथा अंतिम एलओपी के लिए एमसीआई निरीक्षण की राह कांटों भरी है। इससे पार पाने में यदि शासन ने तेजी नहीं दिखाई, तो मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। फरवरी माह तक सात डॉक्टर प्रमोशन के लिए तैयार हैं, जबकि 11 डॉक्टरों का मेडिकल कालेज में कार्य करने के लिए किया गया कांट्रेक्ट पूरा हो रहा है। परेशानी यह है कि कांटेक्ट पूरा करने वाले अधिकांश डॉक्टर यहां काम करने के इच्छुक नहीं हैं।
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राजकीय मेडिकल कालेज में डॉक्टरों की कमी को लेकर शासन पहले ही पसीने बहा रहा है। हर माह के पखवाड़े में वॉक इन इंटरव्यू आयोजित होने के बावजूद सबसे महत्वपूर्ण एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, मेडिसिन आदि विभागों के लिए फैकल्टी नहीं मिल पा रही है। एमसीआई मानकों के अनुसार, 25 प्रतिशत तक की कमी झेल रहा राजकीय मेडिकल कालेज एमसीआई निरीक्षण के लिए किसी भी तरह अर्ह नहीं है। एमसीआई ने नवंबर 2012 से फरवरी 2013 के बीच कभी भी निरीक्षण के लिखित सूचना दी हैं। मेडिकल कालेज में कार्यरत 11 डॉक्टरों के फरवरी माह तक कांट्रेक्ट पूरा हो रहा है। इनमें से अधिकांश डॉक्टर यहां कार्य करने के भी इच्छुक नहीं हैं, जबकि तीन डॉक्टरों का चयन अन्य स्थानों के लिए भी हुआ है।


पीडियाट्रिक्स विभाग परेशानी में
श्रीनगर। पीडियाट्रिक्स विभाग में कार्यरत असिस्टेंट प्रोफेसर डा.व्यास कुमार राठौर की मेडिकल कालेज में नियुक्ति का कांट्रेक्ट पूरा हो चुका है। सूत्रों की मानें, तो वे कांट्रेक्ट रिन्यू कराने के बिल्कुल मूड में नहीं हैं। हालांकि इस मामले में उन्होंने कुछ कहने से इंकार किया है। यदि उनकी सेवाएं आगे नहीं मिलती, तो विभाग में एकमात्र प्रोफेसर व एसोसिएट प्रोफेसर कार्य करेंगे। ये दोनों वर्तमान में अवकाश पर चल रहे हैं। ऐसे में रेजीडेंट डॉक्टरों के भरोसे ही टर्सियरी सेंटर वाले इस अस्पताल के रोगियों को इलाज मिल पाएगा।
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कोट
- शासन से सभी डॉक्टरों के कांट्रेक्ट रिन्यू करने के लिए पत्राचार कर दिया गया है। उम्मीद है कि कार्यकाल पूर्ण होने से पहले ही सभी डॉक्टरों के कांट्रेक्ट नवीनीकरण संबंधी पत्र शासन से प्राप्त हो जाएंगे।
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डा.वीएल जहागिरदार, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कालेज
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