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प्रदेश में वन्य जीव हिंसा के मामलों में पहले स्थान पर एकेश्वर

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पौड़ी। भारतीय वन्य जीव संस्थान ने वन्य जीव हिंसा के मामलों में प्रदेश में पौड़ी जिले के एकेश्वर ब्लॉक को पहले स्थान पर रखा है। इसे सबसे अधिक संवदेनशील करार दिया गया है। भारतीय वन्य जीव संस्थान अब कैमरे के जरिए ब्लॉक एकेश्वर के जंगलों में वन्य जीवों की हर हरकत पर पैनी नजर रखेगा खासकर गुलदार इस कैमरे की नजर में रहेगा। भारतीय वन्य जीव संस्थान ने पौड़ी जिले में सर्वे कराया गया था। सर्वे में सामने आया कि वन्य जीव हिंसा में प्रतिवर्ष तीन से चार लोगों की मौत और 11 से 13 लोग घायल हो रहे हैं। सर्वे में वर्ष 2013 से अब तक के आंकड़ों से स्पष्ट हुआ कि पांच वर्षों में वन्य जीव हिंसा में 27 लोगों की मौत और 57 लोग घायल हुए। जिले के 15 ब्लॉकों में सबसे अधिक घटनाएं एकेश्वर ब्लॉक में हुईं। एकेश्वर में दो से तीन घटना हर साल दर्ज की गईं। भारतीय वन्य जीव संस्थान के मानव वन्य जीव संघर्ष दल ने एकेश्वर का तीन सौ वर्ग किलोमीटर वन क्षेत्र का चयन किया है। मानव वन्यजीव संघर्ष दल के प्रोजेक्ट सहायक डॉ. दीपाजन नाहा ने बताया कि वन क्षेत्र को आठ-आठ वर्ग किलोमीटर में विभाजित किया गया है। इन क्षेत्रों में हाई रिजोल्यूशन ट्रैप कैमरे लगाए जाएंगे। गुलदार, भालू के अलावा अन्य वन्य जीवों की हरकतें भी इसमें कैद होंगी। इसके अलावा ग्रामीणों को भी हिंसक वन्य जीवों की प्रवृत्ति, आवास, रहन-सहन आदि की जानकारी दी जा रही है ताकि वे हिंसक वन्य जीवों से सुरक्षित रहें।
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कोट
वन्य जीव हिंसा के लिहाज से पौड़ी पहले पायदान पर है। यही वजह है कि पौड़ी में भारतीय वन्य जीव संस्थान मानव जीवन सुरक्षा के लिए कार्य कर रहा है। ब्लॉक एकेश्वर के जंगलों में ट्रैप कैमरों से लगातार अध्ययन होगा। इसके बाद वन्य जीव हिंसा रोकने की सटीक योजना तैयार की जाएगी। -रमेश चंद्रा, डीएफओ गढ़वाल, पौड़ी।
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