पौड़ी। जिले में गोवंशीय एवं महिषवंशीय पशुओं में लंपी स्किन डिजीज के अब तक 39 मामले सामने आए हैं। इनमें से आठ पशु उपचार के बाद स्वस्थ हो चुके हैं। बीमारी की रोकथाम और संभावित प्रसार को नियंत्रित करने के लिए पशुपालन विभाग ने जिले में 100 टीमें गठित की हैं। टीमें प्रभावित और संभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी कर रही हैं।
मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. विशाल शर्मा ने बताया कि जिले में लंपी के मामले फिलहाल कम हैं और विभाग की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि संदिग्ध पशुओं की जांच और उपचार के साथ ही पशुपालकों को बीमारी से बचाव के उपायों की जानकारी दी जा रही है।
उन्होंने पशुपालकों से पशुओं को मक्खी और मच्छरों से बचाने की अपील की। बताया कि लंपी बीमारी के प्रसार में मक्खी-मच्छर जैसे वाहक भूमिका निभा सकते हैं। ऐसे में पशुशालाओं में साफ-सफाई रखने के साथ आसपास पानी जमा न होने देने और पशुओं को कीटों से सुरक्षित रखने पर विशेष ध्यान देना जरूरी है।
विभागीय टीमें गांव-गांव पहुंचकर पशुओं की स्थिति की निगरानी कर रही हैं। पशुपालकों से किसी पशु के शरीर पर गांठ, बुखार या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र या विभागीय टीम को सूचना देने को कहा गया है। विभाग ने पशुपालकों से सतर्कता बरतने और संक्रमित अथवा संदिग्ध पशुओं को अन्य पशुओं से अलग रखने की भी अपील की है।