श्रीनगर। ऑलवेदर रोड के तहत निर्माणाधीन सिरोहबगड़ बाईपास मोटर मार्ग का मलबा अलकनंदा नदी में डाला जा रहा है। हालांकि कार्यदायी एजेंसी ने नदी किनारे मलबा रोकने के लिए दीवार का निर्माण किया है, लेकिन यह खानापूर्ति साबित हो रहा है। वहीं, मामला संज्ञान में आने पर लोनिवि राष्ट्रीय राजमार्ग खंड ने मलबा निस्तारण की उचित व्यवस्था होने तक एजेंसी को काम बंद करने के निर्देश दिए हैं।
ऋषिकेश-बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर श्रीनगर से करीब 16 किलोमीटर दूर रुद्रप्रयाग की ओर से भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र सिरोहबगड़ का कोई समाधान नहीं निकल पाया, जिसके चलते सिरोहबगड़ से आधा किलोमीटर पहले से अलकनंदा नदी पार पपड़ासू होते हुए बाईपास मोटर मार्ग का निर्माण किया जा रहा है। लगभग 3.250 किलोमीटर लंबा यह मार्ग खांकरा से आगे पुन: बदरीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ेगा। पिछले कुछ माह से अलकनंदा के ऊपर मशीनों से कटिंग काम चल रहा है। कार्यदायी एजेंसी मलबे को सुरक्षित स्थान में डंप करने के बजाय मशीनों से सीधे नीचे की ओर लुढ़का रही है। महत्वपूर्ण बात यह है कि नया मार्ग होने की वजह से यहां वाहनों की आवाजाही नहीं है। ऐसे में यहां मशीनों से डंपरों में मलबे को उठाने में कोई दिक्कत भी नहीं है, लेकिन अपना समय और पैसा बचाने के लिए मिट्टी और पत्थरों को नदी में फेंक दिया जा रहा है। हालांकि खानापूर्ति के लिए एजेंसी ने नदी किनारे मलबा रोकने के लिए पत्थरों की दीवार खड़ी की है। जो मलबे से शुरुआत में भर गई। अधिशासी अभियंता लोनिवि राष्ट्रीय राजमार्ग खंड रुद्रप्रयाग जितेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि शिकायत मिलने पर मैंने स्वयं निरीक्षण किया। स्थिति ठीक नहीं लगने पर काम की मॉनिटरिंग के लिए नियुक्त ऑथोरिटी इंजीनियर से एजेंसी को नोटिस देने के लिए कहा। मलबा नदी में गिरने की पुन: शिकायत पर एजेंसी को काम बंद करने के लिए कह दिया है। अब एजेंसी पहले मलबा निस्तारण का स्थान और व्यवस्था दिखाएगी। तब काम पुन: शुरू कराया जाएगा।